जंगली जानवर डिहाइड्रेशन के शिकार हो रहे हैं। इसकी वजह से जानवरों के व्यवहार में भी बदलाव हो रहा है। वह प्यास बुझाने के लिए आबादी की ओर रुख कर रहे हैं और बदलते व्यवहार के कारण ‘आसान शिकार’ को निवाला बना रहे हैं। नतीजा मानव वन्य जीव संघर्ष बढ़ने की आशंका और पुख्ता होती जा रही है।
सूत्रों के अनुसार बाघ, गुलदार जैसे जानवर जंगल में ही जल स्रोतों से प्यास मिटाते हैं। इधर जंगलों में इंसानी घुसपैठ बढ़ी है। ग्लोबल वार्मिंग, खनन, वनों के कटान, बारिश की कमी से जंगलों में पानी के जल स्रोत तेजी से सूख रहे हैं। गर्मियों में हालत बदतर हो गए हैं। जल स्रोतों के सूखने से जानवरों को भी पानी की कमी से जूझना पड़ा।