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Dehradun News: दून-हरिद्वार के बीच ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने के लिए सुझाव देंगे डब्ल्यूआईआई के वैज्ञानिक

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II-भारतीय वन्यजीव संस्थान और रेलवे के बीच हुआ समझौता
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I-वैज्ञानिकों की टीम पांच माह में अध्ययन कर तैयार करेगी रिपोर्ट
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Iदेहरादून-हरिद्वार के बीच राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने के साथ ही वन्यजीवों को दुर्घटनाओं से बचाने के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के वैज्ञानिकों की टीम विस्तृत अध्ययन करेगी। इसे लेकर भारतीय वन्यजीव संस्थान और रेलवे के बीच समझौते पर हस्ताक्षर भी किए गए हैं।
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Iभारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों को पांच माह के भीतर अध्ययन करने के साथ ही रेलवे को विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। इसके बाद ही रेलवे की ओर से वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर तमाम कदम उठाए जाएंगे। मंडल रेल प्रबंधक अजय नंदन ने शुक्रवार को पत्रकारों से वार्ता में बताया कि वर्तमान में देहरादून से हरिद्वार के बीच राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में ट्रेनों का संचालन 35 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से किया जा रहा है। ताकि टाइगर रिजर्व क्षेत्र में रेलवे लाइनों को पार करने वाले हाथियों, बाघों समेत तमाम वन्यजीवों को हादसे से बचाया जा सके। इसके बावजूद हर साल हाथियों समेत कई वन्यजीवों की ट्रेनों की टक्कर से मौत हो जाती है।
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Iवहीं, ट्रेनों की रफ्तार कम होने से रेलवे को अतिरिक्त खर्च करने के साथ ही यात्रियों के समय की बर्बादी होती है। इसी के मद्देनजर अब भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों से अध्ययन कराया जा रहा है कि वन्यजीवों को ट्रेनों की टक्कर से बचाने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं। साथ ही ट्रेनों की रफ्तार को 35 किलोमीटर से बढ़ाकर 80 किमी कैसे किया जा सकता है।
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Iबता दें कि राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में ट्रेनों का संचालन 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से करने के लिए रेलवे की ओर से ट्रायल भी किया गया था। यह ट्रायल सफल रहा था। ऐसे में रेलवे अधिकारियों का प्रयास है कि देहरादून से हरिद्वार के बीच ट्रेनों का संचालन तेजी से कराया जाए।I
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Iपिछले दो दशक में ट्रेनों की चपेट में आकर 35 हाथी गवां चुके हैं जान
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Iवन विभाग और राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले दो दशक के भीतर देहरादून-हरिद्वार के बीच ट्रेन की चपेट में आकर 35 हाथी अपनी जान गवां चुके हैं। जिस पर टाइगर रिजर्व अधिकारियों की ओर से ट्रेनों के लोको पायलटों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धाराओं में मुकदमा भी दर्ज कराया गया।I
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