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पत्नी और मायके वालों ने किया ऐसा धोखा कि पति के पैरों तले खिसकी जमीन

Sun, 09 Apr 2017 10:59 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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फाइल फोटो - फोटो : social media
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शादी के चार साल बाद पति को पत्नी और ससुराज वालों का सच सामने आया कि उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। पढ़िए चौंकाने वाली खबर...
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लड़की को एमए बताकर उसका विवाह तय किया, लेकिन चार साल बाद पता चला कि वह आठवीं पास है। इससे हैरान पति अब कानूनी कार्रवाई की तैयारी में है।

उसका कहना है कि उसके साथ धोखा हुआ है, यदि उसे पहले ही सच्चाई बता दी जाती तो भी वह इस रिश्ते के लिए न नहीं कहता। वही महिला भी शैक्षिक प्रमाण पत्रों का फर्जी होना बता रही है। महिला और उसके पति के इस दावे से हिंदी साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद और एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में हैं।
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50 हजार रुपये देकर अंक पत्र फर्जी तरीके से बनवाया गया

गढ़वाल विश्वविद्यालय - फोटो : file photo
हर्रावाला दून निवासी एक व्यक्ति ने बताया कि वर्ष 2013 में टीएचडीसी कालोनी देहराखास से उसका विवाह हुआ। विवाद से पूर्व जब वह लड़की को देखने गया तो ससुराल वालों ने बताया कि लड़की एमए पास है, लेकिन अब उसे पता चला कि लड़की एमए नहीं बल्कि आठवीं पास है।

उसकी पत्नी ने उसे बताया कि हिंदी साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद और हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में उसने दाखिला नहीं लिया। हिंदी साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद से प्रथमा, इसी संस्थान से विशारद और हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से बीए प्रथम वर्ष संस्थागत अंक पत्र के बारे में पूछे जाने पर उसकी पत्नी ने बताया कि उसके पिता ने इसे बनवाया है। 50 हजार रुपये देकर इसे फर्जी तरीके से बनवाया गया है।

इस व्यक्ति ने बताया कि उसकी अपनी पत्नी से कोई नाराजगी नहीं है। नाराजगी है तो सिर्फ इस बात को लेकर कि उसके ससुराल वालों ने शादी के लिए झूठ का सहारा लिया। हर्रावाला निवासी इस व्यक्ति ने बताया कि वह व्यवसायी है और बद्रीनाथ में उसकी दुकान है। उसके ससुर पुलिस में हैं और मुख्यमंत्री आवास के कार्यरत हैं। जबकि सास सरकारी स्कूल में शिक्षिका है। वही उसकी पत्नी का कहना है कि उसके पिता ने शायद यह सोचकर फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र बनवाए कि इससे उसकी शादी हो जाएगी।  
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अशासकीय स्कूलों में है सबसे अधिक फर्जीवाड़ा 

- फोटो : demo pic
विभागीय सूत्रों के मुताबिक रुद्रप्रयाग जनपद के तीनों ब्लॉकों के शासकीय और अशासकीय स्कूलों में कई टीचर बीएड के फर्जी अंक पत्र के आधार पर नौकरी पाए हुए हैं। यदि उच्च स्तरीय जांच हो तो कई टीचरों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। 

नये भीतर और पुराने बाहर 
प्रदेश के अशासकीय स्कूलों में इस तरह के कई मामले सामने आए हैं जिसमें स्कूल के अनुदान सूची में शामिल होते ही रिश्तेदारों और परिचितों को नियुक्तियां दी गई हैं। वही पुराने टीचरों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है। 

टीचरों की नियुक्ति में दोहरे मानक 
प्रदेश के अशासकीय स्कूलों में व्यायाम शिक्षकों के पदों पर हुई नियुक्तियों में दोहरे मानक अपनाए गए हैं। गढ़वाल मंडल में बीपीई के साथ बीपीएड वालों को नियुक्ति नहीं दी गई। वही कुमाऊं मंडल में इस तरह के अभ्यर्थियों को नियुक्तियां दी गई। ताजा मामला करनपुर क्षेत्र के एक अशासकीय स्कूल का है। यहां एक अभ्यर्थी का मेरिट सूची से नाम यह कहते हुए हटा दिया गया कि वह बीपीई के साथ एलटी या बीएड नही है। वह बीपीएड है।
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