त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आज (9 मार्च) शाम चार बजे राज्यपाल बेबी रानी मौर्य से मुलाकात की और उन्हें अपना इस्तीफा सौंप दिया। इसके बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि मैं लंबे समय से राजनीति कर रहा हूं। चार वर्षों से पार्टी ने मुझे सीएम के रूप में सेवा का मौका दिया। मैं कभी सोच नहीं सकता था कि मैं कभी सीएम बन सकता हूं, लेकिन भाजपा ने मुझे सेवा करने का मौका दिया। पार्टी ने अब निर्णय लिया है कि सीएम के रूप में सेवा करने का अवसर अब किसी और को दिया जाना चाहिए। हालांकि, जब इस्तीफा देने का कारण पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह जानने के लिए आपको दिल्ली जाना पड़ेगा।
सूत्रों के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी में विधायकों और कुछ मंत्रियों के बीच नाराजगी के चलते त्रिवेंद्र सिंह रावत को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। दरअसल, इन नेताओं की त्रिवेंद्र सिंह रावत के मुख्यमंत्री बने रहने पर नाराजगी जताई थी। ऐसे में उनके पद पर संकट मंडराने लगा था। विवाद सामने आने के बाद केंद्रीय नेतृत्व भी इस मसले पर मंथन कर रहा था, जिसके बाद रावत के इस्तीफे की अटकलें तेज हो गई थीं।
गौरतलब है कि उत्तराखंड में मंत्रियों और विधायकों के एक धड़े ने मुख्यमंत्री का चेहरा बदलने की मांग की थी। साथ ही, इस मामले की जानकारी केंद्रीय नेतृत्व को भी दी थी। उनका कहना था कि अगर मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं बदला गया तो अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
इस मामले के लिए पार्टी आलाकमान ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रमन सिंह, महासचिव और राज्य के प्रभारी दुष्यंत गौतम को विधायक दल की बैठक के लिए पर्यवेक्षक बनाया। इन दोनों के सामने भी पार्टी के अगला चुनाव हारने की आशंका जाहिर की गई, जिसके बाद उन्होंने अपनी रिपोर्ट पार्टी अध्यक्ष को सौंप दी।
बता दें कि राज्य में बढ़ रही राजनीतिक सरगर्मी के बीच त्रिवेंद्र सिंह रावत को पार्टी आलाकमान ने सोमवार (8 मार्च) को दिल्ली तलब किया था। रावत राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण जाने वाले थे, लेकिन उन्होंने अपना दौरा रद्द कर दिया और दिल्ली पहुंच गए। वह दोपहर में पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिले। वहीं, देर शाम तक नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें संगठन महामंत्री बीएल संतोष भी शामिल थे।