हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर के जनाजे में शामिल होने के बाद पुलिस के रडार पर रहा वॉटेड दानिश अहमद ने यूं ही सरेंडर नहीं किया। हम आपको बताते हैं इसके पीछे का पूरा सच कि आखिरकार दानिश ने सरेंडर क्यों किया।
दरअसल, हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर के जनाजे में शामिल हुए कश्मीरी छात्र दानिश को कश्मीर के ही दो छात्रों की सजगता से पकड़ा जा सका है। जनाजे में हाथ में ग्रेनेड लिए दानिश की तस्वीर एक समाचार पत्र में छपी थी।
यह तस्वीर देखकर देहरादून में कश्मीर के दो छात्रों ने दानिश को पहचान लिया और कॉलेज के निदेशक डा. संजय चौधरी को सूचना दी। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन की सजगता से दानिश के बारे में अधिक जानकारी मिल सकी।