शाम को घर पहुंचने पर अभिराज (4) पुत्र सुमन लाल की फिर से रात में तबीयत बिगड़ गई। अभिराज के मामा मुलम दास उसको लेकर गुरुवार तड़के करीब तीन बजे देहरादून रवाना हुए। मुलमदास ने बताया कि सुबह करीब छह बजे वह दून अस्पताल पहुंचे।
लेकिन दून अस्पताल में आईसीयू यूनिट खाली न होने से अभिराज तड़पता रहा। उसके बाद वह उसे एक निजी नर्सिंग होम में ले गए। लेकिन सुबह 7.30 बजे के लगभग उसने दम तोड़ दिया। इस घटना से शिवदास के घर और गांव में कोहराम मचा हुआ है।
बारिश के मौसम में अधिकतर जंगलों में उगने वाली मशरूम की प्रजातियां हानिकारक होती हैं। जंगली मशरूम की कई प्रजातियां विषाक्त होती हैं। जिस कारण जहरीले मशरूम के सेवन से फूड प्वाइजनिंग होती है। जंगली मशरूम में मौजूद अमीनो टोक्सिन यकृत और किडनी को नुकसान पहुंचाते हैं।
-डा.अमित राय, फिजिशियन जिला अस्पताल
जंगली मशरूम की छतरी में चमकीलानूमा संरचना होती है। जड़ के भाग की गाठ अधिक मोटी होती है। जिस मशरूम का कृषिकरण होता है उसकी जड़ की गाठ पतली होती है। पीला, नारंगी और लाल रंग के जंगली मशरूम को कभी भी नहीं खाना चाहिए। वह रंग के कारण अधिक जहरीला होता है।
डा.लक्ष्मी रावत,प्लांट पैथोलाजिस्ट वानिकी विवि रानीचौरी