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Dehradun News: कौन पढ़ाए नियमों का पाठ, यातायात संभालने के लिए भी कर्मचारी नहीं

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II- 23 साल बाद बढ़ा था नियतन, मगर अब भी सिपाही से लेकर सब इंस्पेक्टर तक की कमी
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I- करीब आधे ही कांस्टेबल मौजूद हैं यातायात पुलिस में, एएसआई भी नियतन से आधे
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Iसड़कों पर लगातार बढ़ रहे यातायात के दबाव में लोगों को नियमों का पाठ पढ़ाना तो दूर यहां निगरानी तक के लिए कर्मचारी नहीं हैं। यातायात बढ़ रहा है, इसकी याद हुक्मरानों को 23 साल बाद आई तो पुलिस का नियतन बढ़ा दिया, लेकिन कर्मचारी आज तक नहीं मिले।
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Iहालात ये हैं कि यहां पदों के सापेक्ष कांस्टेबल की 50 फीसदी कमी है। जबकि, सब इंस्पेक्टर तो 20 फीसदी ही मौजूद हैं। यही नहीं एएसआई और हेड कांस्टेबल के भी लगभग आधे पद खाली हैं। दरअसल, जब राज्य बना तो यहां पर यातायात पुलिस का नियतन भी तय किया गया। शहर में उस वक्त एक इंस्पेक्टर तीन सब इंस्पेक्टर और 104 सिपाहियों का फोर्स दिया गया था। राजधानी में यातायात लगातार बढ़ रहा था तो ऊपरी स्तर पर अधिकारियों को तैनात किया गया। जब यहां की यातायात फोर्स के नेतृत्व को 2008 में डीएसपी स्तर के अधिकारी को तैनात किया गया। इसके बाद फिर लगा कि यहां एसपी स्तर का अधिकारी बैठाना चाहिए।
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Iलिहाजा, 2010 में यहां एसपी स्तर के अधिकारी को बैठाया गया, लेकिन नीचे के कर्मचारियों का नियतन जस का तस ही रहा। वर्ष 2023 में यहां यातायात पुलिस का नियतन बढ़ा दिया गया। एक की जगह चार इंस्पेक्टर, तीन की जगह 20 सब इंस्पेक्टर और 104 सिपाहियों को बढ़ाकर 122 कर दिया गया। इसके बीच में एएसआई और हेड कांस्टेबल के पद भी आए। ऐसे में नियतन तो बढ़ गया, लेकिन सड़कों पर यातायात पुलिस नहीं दिखाई दी। यानी यहां पर कर्मचारी तैनात ही नहीं हुए।
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Iहालात ये हैं कि यहां वर्तमान में इंस्पेक्टर तो पूरे हैं, लेकिन सब इंस्पेक्टर 20 के सापेक्ष केवल चार ही मौजूद हैं। एएसआई 24 होने चाहिए, लेकिन 14 ही तैनात हैं। 20 हेड कांस्टेबल के सापेक्ष राजधानी में केवल 14 ही हेड कांस्टेबल हैं। इसी तरह सिपाहियों की संख्या 122 होनी चाहिए, लेकिन तैनात यहां केवल 69 ही हैं। इनके साथ में 37 महिला सिपाही भी हैं।I
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