एक सितंबर की सुबह से शहर में कूड़ा उठान का बड़ा संकट खड़ा होने वाला है। कूड़ा उठाकर उसे शीशमबाड़ा स्थित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट एंड रिसाइक्लिंग प्लांट में डंप करने और प्लांट संचालन का जिम्मा संभाल रही रैमकी इनवायरो इंजीनियर्स लिमिटेड और चेन्नई एमएसडब्ल्यू प्राइवेट लिमिटेड ने एक सितंबर से बोरिया बिस्तर बांधने का एलान कर दिया है।
देहरादून में कूड़ा निस्तारण की समस्या को दूर करने के लिए वर्ष 2018 में शीशमबाड़ा में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट एंड रिसाइक्लिंग प्लांट बनकर तैयार हुआ। इसके संचालन का जिम्मा रैमकी इनवायरो इंजीनियर्स लिमिटेड को दिया गया। इसी की सहायक कंपनी चेन्नई एमएसडब्ल्यू वर्ष 2019 से शहर के 100 में से 69 वार्डों में कूड़ा उठा रही है। जबकि, 15 वार्डों में मेमर्स सनलाइट, 14 में इकॉन एनर्जी लिमिटेड और दो वार्डों में एनजीओ कूड़ा उठाती है।
प्लांट में तीन लैंड फिल बनाए गए हैं। 2018 में नगर निगम और रैमकी कंपनी के बीच करार के दौरान तय हुआ था कि रोजाना प्लांट में निस्तारण के बाद ढाई से तीन टन कूड़ा ही डंप होगा। इससे तीनों लैंड फिल करीब 15 साल में भरेंगे, लेकिन नगर निगम का आरोप है कि कंपनी ने कूड़ा निस्तारित किए बगैर लैंड फिल में डालना शुरू कर कर दिया। नतीजतन तीनों लैंड फिल पांच साल में भर गए और वहां कूड़े का पहाड़ बन गया।
इस बीच नगर निगम ने लापरवाही का आरोप लगाकर कंपनी का भुगतान रोकना और जुर्माना लगाना शुरू कर दिया। भुगतान रोकने और शीशमबाड़ा में एनर्जी प्लांट लगाने की अनुमति मिलने पर नगर निगम और कंपनी के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। इसके चलते कंपनी ने एक महीने पहले नगर निगम को नोटिस दे दिया था कि वह 31 अगस्त को रात 12 बजे के बाद वार्डों में घर-घर कूड़ा उठान और प्लांट संचालन का काम छोड़ देगी।
...तो 500 कर्मचारी हो जाएंगे बेरोजगार
एमएसडब्ल्यू कंपनी में 500 से अधिक कर्मचारी कार्य करते हैं। 31 अगस्त की आधी रात से काम बंद करने पर ये कर्मचारी बेरोजगार हो जाएंगे। कंपनी सूत्रों ने बताया कि सभी कर्मचारियों को एक महीने पहले ही लिखित नोटिस दे दिया गया था। उन्हें बता दिया गया था कि 31 अगस्त के बाद उनकी सेवा समाप्त हो जाएगी।
तीन साल में एक भी पैसा नहीं बढ़ाया
कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि जब कूड़ा उठाकर शीशमबाड़ा पहुंचाने का एग्रीमेंट हुआ था तो एक टन कूड़े के निस्तारण का 1205 रुपये रेट तय हुआ था। साथ ही यह भी निर्धारित हुआ था कि समय-समय पर यह दर बढ़ती रहेगी, लेकिन तीन साल में नगर निगम ने एक बार भी शुल्क नहीं बढ़ाया। जबकि, इस अवधि में डीजल और मजदूरी में काफी बढ़ोतरी हो चुकी है।
83 करोड़ रुपये का नहीं किया भुगतान
नगर निगम पर एमएसडब्ल्यू कंपनी का 83 करोड़ रुपये बकाया है। कंपनी की ओर से बार-बार मौखिक और पत्राचार करने के बावजूद नगर निगम भुगतान नहीं कर रहा है। कंपनी अधिकारियों का कहना है कि ऐसे में कर्मचारियों का वेतन और दूसरे खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है। कूड़ा उठान और निस्तारण का कार्य बंद करने के पीछे एक बड़ी वजह यह भी है।
लगातार शिकायत आ रही थी कि कंपनी घर-घर कूड़ा उठान ठीक से नहीं कर रही है। कई बार तो एक-एक हफ्ते तक भी कूड़ा गाड़ी घर-घर उठान नहीं कर रही थी। कंपनी प्लांट में कूड़े का निस्तारण भी ठीक से नहीं कर रही थी। इससे आसपास के क्षेत्रों में गंदगी फैल रही थी। इसे लेकर क्षेत्रवासी लंबे समय से आंदोलन भी कर रहे हैं। कार्यों में शिकायतों के चलते कूड़ा उठान का शुल्क नहीं बढ़ाया गया। कंपनी को भुगतान भी समय-समय पर किया जाता है, लेकिन शिकायतों के चलते इसे भी रोका गया है।
-मनुज गोयल, नगर आयुक्त