बरसात में गंगा नदी से हुए किसानों को नुकसान का मुआवजा देने के मामले की एक ग्रामीण की शिकायत पर जिलाधिकारी ने जांच कराई तो गड़बड़ी सामने आई। जांच में सामने आया कि जिन 23 ग्रामीणों के पास जमीन नहीं है, उन्हें भी राजस्व विभाग की ओर से बाढ़ पीड़ित दिखाकर लाखों रुपये का मुआवजा बांट दिया गया। जिला प्रशासन की ओर से संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
पिछले वर्ष बरसात में बाढ़ से खानपुर क्षेत्र के काफी किसानों की काफी कृषि भूमि बह गई थी। साथ ही सैकड़ों बीघा कृषि भूमि में खड़ी कृषि फसल भी नष्ट हो गई थी। तहसील प्रशासन की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर दो माह पहले प्रशासन ने प्रभावित किसानों को मुआवजा बांटा था। इसी वर्ष एक जनवरी को लक्सर में तहसील दिवस में कलसिया गांव के जयसिंह ने मुआवजा वितरण में गड़बड़ी की शिकायत जिलाधिकारी दीपक रावत से की थी।
जिलाधिकारी ने मामले की जांच राजस्व निरीक्षक वीर सिंह सैनी से कराई थी। जांच में रघुनाथपुर उर्फ बालावाली में बड़े स्तर पर सरकारी पैसे की बंदरबांट करने की बात सामने आई है। जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि गांव के 23 लोग जिनके पास भूमि भी नहीं थी, राजस्व विभाग ने उन्हें बाढ़ पीड़ित दिखाकर सात लाख 29 हजार के चेक दे दिए। जांच रिपोर्ट के बाद प्रशासन अब दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है।
तहसीलदार इस पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। जिन ग्रामीणों को अपात्र होते हुए भी चेक दिए गए हैं उनसे रिकवरी और उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। दोषी कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
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कौस्तुभ मिश्रा, उपजिलाधिकारी लक्सर