कस्टमर केयर नंबर खोजने के चक्कर में इंटरनेट पर आप साइबर ठगों का शिकार बन सकते हैं। ऐसा तभी होता है जब वेबसाइट पर असली-नकली की पहचान नहीं हो पाती। इसके लिए जरूरी है कि आप वेबसाइट में कंपनी के नाम की स्पेलिंग और वेबसाइट का एक्सटेंशन यानी (डॉट कॉम, डॉट इन) चेक कर लें। ताकि, ठगों के जाल में फंसने से बचा जा सके। हुबहू असली जैसी दिखने वाली वेबसाइट पर ही लोग इस तरह की ठगी का शिकार बनते हैं।
साइबर क्राइम के आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान समय में कुल धोखाधड़ी में 35 फीसदी केवल कस्टमर केयर फ्रॉड से जुड़ी हैं। इनमें केवाईसी और एक्सपायरी संबंधी धोखाधड़ी भी शामिल है। जबकि, सेक्सटॉर्शन का हिस्सा 24 फीसदी है और ऑनलाइन बुकिंग फ्रॉड 22 फीसदी होते हैं। बाकी में अन्य तरह के फ्रॉड आते हैं। इनमें सबसे आसान तरीका इंटरनेट पर फर्जी वेबसाइट के माध्यम से चूना लगाना ही होता है। दो साल पहले चारधाम यात्रा की बुकिंग के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी देशभर में हुई थी। लेकिन, पिछले साल एसटीएफ ने तमाम ऐसी वेबसाइट को ब्लॉक कराया जिसमें बुकिंग के नाम पर धोखाधड़ी की जा रही थी।
Roorkee: पेपर मिल के गोदाम में लगी भीषण आग, मौके पर पहुंची नौ दमकल की गाड़ियां, छह घंटे बाद पाया आग पर काबू
ऐसे करते हैं ठगी
किसी भी कंपनी या संस्था का कस्टमर केयर नंबर व्यक्ति इंटरनेट पर सर्च करता है। पहले ही पेज पर ढेरों नंबर आ जाते हैं। इनमें से किसी एक पर कॉल लगाने पर बात ठगों से होती है फिर हजारों और लाखों की ठगी का शिकार लोग बनते हैं। फर्जी वेबसाइट को इस तरह से बनाया जाता है कि वह बिल्कुल असली जैसी लगती हैं। इनमें अक्षर तो वही होते हैं लेकिन उनका क्रम सही नहीं होता है। इसके अलावा, ठग असली वेबसाइट की स्पेलिंग सही रखते हैं तो उसे दूसरे एक्सटेंशन में बनवाते हैं। इससे भी लोग धोखा खा जाते हैं। यदि कंपनी की असली वेबसाइट डॉट कॉम पर बनी है तो उसे डॉट इन पर बना लेते हैं।