राज्य में 16-17 जून की रात को आई जलप्रलय के बाद सेना, वायुसेना, आईटीबीपी और एनडीआरएफ के जवानों ने हजारों चार-धाम तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को सुरक्षित निकाल कर नई जिदंगी दी है।
सेना और अर्द्धसैनिक बलों के लगभग 12 हजार जवान और 47 हेलीकॉप्टर अभियान में जुटे रहे। जवानों के जांबाज हौसले के बूते दुर्गम घाटियों और मुश्किल हालात के बीच सैन्य इतिहास के अब तक के सबसे बड़े बचाव-अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।
चार-धाम यात्रा मार्ग पर चला बचाव अभियान पूरी तरह सेना के जांबाजों के हाथ रहा। वायुसेना हवाई मार्ग से फंसे लोगों को निकाल रही थी, तो सेना और आईटीबीपी ने उफनती नदियों और तबाह सड़कों के बावजूद अपनी पूरी ताकत झोंक रखी थी।
5 जुलाई तक सैन्य बलों ने लगभग एक लाख लोगों को सुरक्षित निकाल लिया था। इस अभियान के दौरान एक हेलीकॉप्टर हादसे में वायुसेना और आईटीबीपी के 20 अधिकारी और जवान शहीद हो गए। लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा बलों का हौसला नहीं डगमगाया।
इन जवानों ने राहत की सांस तभी ली, जब राज्य के चारों धाम सहित तमाम जगह पर फंसे हर आदमी को सुरक्षित निकाल नहीं लिया गया।
बचाव के बाद राहत में जुटे
बचाव अभियान पूरा होने के बाद राज्य सरकार के सहयोग में सेना, अर्द्धसैनिक बल और वायुसेना अपना सहयोग राहत-कार्य में दे रही हैं। सेना, वायुसेना के कम से कम 15 हेलीकॉप्टर तैनात रहे।
वायुसेना का सबसे बड़ा हेलीकॉप्टर एमआई 26 अब भी तैनात है, जबकि आईटीबीपी और एनडीआरएफ के जवान लगातार मदद दे रहे हैं। सड़क निर्माण के लिए बीआरओ के अधिकारी पूरे मानसून में अपना फोकस मुख्य मार्ग पर पुलों और ब्रिज निर्माण पर लगा रहे हैं।