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पढ़िए, कैसे यहां बरसात के कहर के बाद आपदा प्रभावितों का साथी बना व्हाट्सअप?

Sun, 22 Jul 2018 09:18 AM IST
कालिका रावल, अमर उजाला, पिथौरागढ़
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flood - फोटो : amar ujala
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धारचूला और मुन्स्यारी के लोगों ने आपदा में व्हाट्स अप को अपना मददगार बना लिया है। अपना एक ग्रुप बनाकर ये लोग एक दूसरे के सुख दुख के साथी बन गये हैं और जरूरत पड़ने पर एक दूसरे की मदद भी कर रहे हैं। आपदा प्रबंधन की पहली जरूरत त्वरित सूचना को आपस में बांटने का काम ये लोग इसी ग्रुप के जरिये कर रहे हैं।

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एक-दो जुलाई की भीषण आपदा के बाद धारचूला, मुनस्यारी, बंगापानी, तेजम तहसील के 73 परिवार बेघर हो गए हैं। इन परिवारों के 268 सदस्य राहत शिविरों में रह रहे हैं।

पैदल रास्ते और सड़क बंद हैं। सात जुलाई 2018 को मुनस्यारी के सामाजिक कार्यकर्ता हीरा सिंह चिराल ने आपदा से संबंधित खबर नाम से वाट्सएप पर ग्रुप बनाया।
 

सरकारी मशीनरी तक पहुंच रहा प्रभावित क्षेत्र का पल-पल का अपडेट

whatsapp
ग्रुप से करीब 400 लोग जुड़े हैं। इनमें सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों के अलावा अधिकतर लोग आपदा प्रभावित क्षेत्र के हैं। इससे सरकारी मशीनरी तक प्रभावित क्षेत्र का पल-पल का अपडेट पहुंच रहा है।

तीन स्वाधीनता सेनानियों के गांव जोशा, गांधीनगर, गेखान में मची तबाही का मामला हो, गेखान के स्वाधीनता सेनानी भीम सिंह कुंवर के परिजनों के मकान को खतरे की जानकारी हो या फिर पापड़ी गांव के परिवार के बलवंत सिंह के परिवार के गुफा में रहने का मामला, यही ग्रुप सामने लाया।

बसंतकोट, जौलढूंगा की दिक्कत, छोरीबगड़, बमनगांव में मची तबाही, भदेली में हो रहे भूकटाव की जानकारी इसी ग्रुप ने मीडिया और प्रशासनिक मशीनरी तक पहुंचाई। ग्रुप में मामला उठने के बाद मुनस्यारी के एसडीएम केएन गोस्वामी ने संज्ञान लिया और कई प्रभावितों को राहत भी मिली।
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घायलों की मदद में भी अहम भूमिका

दुकान के मलबे के ढेर में बैठे आपदा प्रभावित - फोटो : file photo
आपदा के दौरान घायलों की मदद में भी ग्रुप अहम भूमिका निभा रहा है। मुनस्यारी के बोथी खुशाल सिंह (30) 17 जुलाई को चट्टान से गिरकर घायल हो गया था।

इसकी सूचना सबसे पहले इसी ग्रुप ने सार्वजनिक की। 18 जुलाई को युवक को आपदा खोज एवं बचाव दल, पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से गांव से लाया गया, तो केठीबैंड में 108 वाहन न मिलने पर ग्रुप एडमिन ने ही मदकोट की जिला पंचायत सदस्य दीपा धामी के माध्यम से घायल को मुनस्यारी अस्पताल ले जाने के लिए टैक्सी का प्रबंध किया था।

मवानी दवानी में पत्थरों की चपेट में आई छात्रा रेनू के लिए खून के इंतजाम में भी इस ग्रुप की अहम भूमिका रही।
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