उत्तरकाशी में इस बार सर्दियों में कई दौर की बर्फबारी के चलते जनपद में ऊंचाई वाले करीब 48 गांव करीब डेढ़ माह से बर्फ से ढके हैं। प्रशासन भले ही बर्फ से ढके जिले के सभी मोटर मार्गों पर यातायात बहाल होने का दावा कर रहा हो, लेकिन ऊंचाई वाली करीब आधा दर्जन सड़कों पर यातायात बर्फ व पाले से आज भी जोखिमभरा बना हुआ है। यही नहीं गांवों के पैदल मार्ग भी खतरनाक हो गए हैं।
गंगोत्री घाटी में उपला टकनौर क्षेत्र के साथ ही पिलंग, जौड़ाव, नौगांव प्रखंड में गीठ पट्टी, स्योरी फलपट्टी एवं धारी कफनौल, पुरोला प्रखंड में सर बडियार, मोरी प्रखंड में पर्वत क्षेत्र के गांव बर्फ से पटे हैं। बीते दो दिन से चटक धूप के साथ मौसम खुशगवार होने पर प्रशासन ने यमुनोत्री एवं गंगोत्री हाईवे समेत सभी सड़कों पर यातायात बहाल कर लिया है। सांकरी-तालुका मोटर मार्ग पेड़ गिरने और जखोल-फिताड़ी मोटर मार्ग भूस्खलन से अवरुद्ध है।
गंगोत्री हाईवे पर सुक्की से आगे के साथ ही हर्षिल-मुखबा, कमद-अयांरखाल, राड़ी-कूवां-कफनौल, फूलचट्टी-जानकीचट्टी, हनुमानचट्टी-खरसाली आदि ऊंचाई वाली सड़कों पर बर्फ व पाले से वाहनों की आवाजाही जोखिम भरी बनी हुई है।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल ने बताया कि गंगोत्री हाईवे हर्षिल से आगे अवरुद्ध है। बर्फबारी शुरू होने से पहले ही दूरस्थ गांवों तक खाद्यान्न का एडवांस कोटा पहुंचा दिया था। सभी गांवों में बिजली एवं पेयजल व्यवस्था सुचारु हैं। नवंबर में ही दूरस्थ गांवों में कुल 146 गर्भवती महिलाएं चिह्नित की गई थीं। इनमें से अधिकांश पहले ही सुविधायुक्त प्रसव केंद्रों के आसपास ठहरी हैं, जबकि गांवों में ही रह रही गर्भवती महिलाएं आशा कार्यकर्ता एवं एएनएम के संपर्क में हैं।