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Weather Update: 35 घंटे बाद भी नहीं खुला ऋषिकेश-गंगोत्री हाईवे, ग्रामीणों का जरूरी वस्तुओं की हो रही किल्लत

Wed, 26 Aug 2020 12:30 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नरेंद्रनगर (टिहरी)

सार

  • दो दिन सड़क बंद रहने से टिहरी में जरूरी वस्तुओं की किल्लत
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- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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ऋषिकेश-गंगोत्री हाईवे पर मंगलवार को 35 घंटे बाद भी यातायात बहाल नहीं हो पाया है। क्षेत्र में हुई भारी बारिश के कारण पीटीसी मार्ग भी बंद हो गया, जिससे छोटे वाहनों को हिंडोलाखाल से नीर होते हुए नरेंद्रनगर पहुंचाया गया। सड़क बंद होने के कारण बड़े वाहनों को भद्रकाली और चंबा में रोके जाने से वाहनों की लंबी कतार लग गई, जिससे टिहरी में सब्जी सहित जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति नहीं हो पाई।

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सोमवार सुबह नरेंद्रनगर कुम्हारखेड़ा में चट्टान टूटने से राजमार्ग सात बजे बंद हो गया था। मलबा हटाने के लिए दोनों ओर जेसीबी और पोकलैंड लगा दी गई थी, लेकिन मिट्टी-बोल्डर इतना अधिक था कि राजमार्ग दूसरे दिन मंगलवार शाम छह बजे तक 35 घंटे बाद भी नहीं खुल पाया। बारिश के कारण पीटीसी मार्ग भी सोमवार शाम को बंद हो गया तो छोटे वाहनों को हिंडोलाखाल से नीर होते हुए नरेंद्रनगर मार्ग से भेजा गया।



ऋषिकेश-बदरीनाथ मार्ग भी तोताघाटी और ब्यासी में कई दिनों से बंद होने के कारण वहां का ट्रैफिक ऋषिकेश-चंबा-गडोलिया से संचालित किया जा रहा है, लेकिन यह सड़क भी नरेंद्रनगर में बंद होने से भद्रकाली और चंबा से खाड़ी तक बड़े वाहनों की लंबी कतार लग गई, जिससे टिहरी में जरूरी सामान की किल्लत होने लगी है। आपदा प्रबंधन विभाग ने मंगलवार देर रात तक सड़क खुलने की बात कही है।

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चार घंटे तक बंद रहा बदरीनाथ हाईवे 

बदरीनाथ हाईवे विभिन्न जगहों पर मलबा और बोल्डर आने से करीब चार घंटे तक बंद रहा। जिले में रुक-रुककर हो रही भारी बारिश के कारण हाईवे बार-बार बंद हो रहा है, जिससे तीर्थयात्रियों, सेना के जवानों और लोगों को आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बदरीनाथ हाईवे गौचर से कंचनगंगा तक विभिन्न स्थानों पर खतरनाक बना है। ऑलवेदर रोड परियोजना की हिल कटिंग कार्य से हाईवे की और भी खस्ता हालत हो गई है।

मंगलवार को गौचर आईटीबीपी कैंप के समीप, बाजपुर, लंगासू, क्षेत्रपाल, बिरही, कोड़िया, टंगड़ी, पागलनाला और लामबगड़ में हाईवे पर सुबह छह से दस बजे तक मलबा और बोल्डर आने से वाहनों की आवाजाही रुकी रही। एनएचआईडीसीएल और एनएच (लोनिवि) की जेसीबी के जरिए मलबा हटाने के बाद वाहनों की आवाजाही सुचारु हो सकी। एनएच के ईई जितेंद्र त्रिपाठी का कहना है कि मौसम सामान्य होने पर हाईवे के क्षतिग्रस्त हिस्सों का सुधारीकरण कार्य किया जाएगा।

मस्तूरा घाटी में हाईवे के 200 मीटर हिस्से पर भूधंसाव

चमोली व रुद्रप्रयाग जिले के मंडल व तुंगनाथ घाटी को जोड़ने वाला कुंड-ऊखीमठ-चोपता-गोपेश्वर हाईवे भूधंसाव के कारण बदहाल हो गया है। हाईवे पर जगह-जगह दरारें पड़ गई हैं, जिससे वाहनों के फंसने के साथ पैदल आवाजाही भी मुश्किल हो गई है। ऊखीमठ से आठ किमी आगे मस्तूरा घाटी में गोपेश्वर हाईवे का लगभग दौ सौ मीटर हिस्सा भूधंसाव से बदहाल हो चुका है। ताला में हाईवे पांच सौ मीटर हिस्से में उबड़-खाबड़ हो गया है।

ग्राम प्रधान कुंवर सिंह बजवाल, योगेंद्र सिंह नेगी, महिपाल सिंह बजवाल, प्रदीप सिंह आदि का कहना है कि अगर यही स्थिति रही तो बस्ती क्षेत्रों में जानमाल के नुकसान से इंकार नहीं कर सकते हैं। इधर, एनएच के अधिशासी अभियंता जितेंद्र कुमार त्रिपाठी ने बताया कि हाईवे के भूधंसाव जोन की भू-वैज्ञानिकों से सर्वेक्षण कराने के बाद स्थायी मरम्मत की जाएगी।

यमुनोत्री हाईवे पर 27 घंटे बाद बहाल हुआ यातायात

कुथनौर में भूस्खलन के कारण बीते रोज बाधित हुए यमुनोत्री हाईवे पर करीब 27 घंटे बाद यातायात बहाल कर लिया गया। सोमवार देर रात हुई बारिश के कारण जगह-जगह भूस्खलन व भूधसांव से जिले के छह संपर्क मार्ग भी बाधित हुए, जिन्हें खोलने का कार्य चल रहा है।

कुथनौर क्षेत्र में भूस्खलन होने के कारण यमुनोत्री हाईवे सोमवार दोपहर को बंद हो गया था, जो मंगलवार देर शाम खुल पाया। भूस्खलन के कारण 33केवी की लाइन क्षतिग्रस्त होने से गीठ पट्टी व ओजरी क्षेत्र के डेढ़ दर्जन गांवों में बिजली आपूर्ति दूसरे दिन भी ठप पड़ी रही।

उधर, सोमवार देर रात की बारिश के कारण हुए भूस्खलन व भूधंसाव से आराकोट-चीवां, टिकोची-किराणु, आराकोट-भुटाणु, हनुमानचट्टी-खरसाली, जुगल्डी-पंजियाला व कुनसाला-कुपड़ा मोटर मार्ग भी बाधित हो गए।

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल ने बताया कि यमुनोत्री हाईवे समेत चार संपर्क मार्गों पर यातायात बहाल कर दिया गया है, जबकि जुगल्डी-पंजियाला व कुनसाला-कुपड़ा मोटर मार्ग जल्द खोल दिया जाएगा। गीठ पट्टी व ओजरी क्षेत्र में बाधित विद्युत आपूर्ति को संबंधित विभाग द्वारा ठीक किया जा रहा है। 

हाम्टी कापड़ी में भूस्खलन, खतरे में 12 मकान

बागेश्वर में भूस्खलन से कपकोट के रामगंगा घाटी के हाम्टीकापड़ी ग्राम पंचायत के हालात खराब हो गए हैं। ग्राम पंचायत के कापड़ी तोक में पहाड़ी दरकने और भूस्खलन से सरकारी प्राथमिक स्कूल में दरार आ गई है। तोक के 12 परिवारों ने मकानों को खतरा उत्पन्न होने पर अन्यत्र शरण ले रखी है।

भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर लौटे कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री ललित फर्स्वाण, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश ऐठानी ने बताया कि पिछले दिनों हुई अतिवृष्टि से प्राथमिक स्कूल के भवन में कई जगह दरार आ गई है। स्कूल भवन कभी भी क्षतिग्रस्त हो सकता है। पहाड़ी में भूस्खलन हो रहा है। गांव जगह-जगह दरार आने से मकानों को भी खतरा हो गया है। लोगों के आंगन दरक गए हैं। कापड़ीगांव के 12 परिवार घर छोड़कर लोग गांव में ही अन्यत्र रह रहे हैं।

कांग्रेस नेताओं ने कहा हाम्टीकापड़ी के लोगों के दिक्कतों को प्रशासन के सामने रखा जाएगा। उनकी दिक्कतों का समाधान कराने का प्रयास किया जाएगा। भ्रमण में पूर्व प्रधान नरेंद्र कोरगा, हीरा सिंह, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य नरेंद्र कोरंगा, राजेंद्र कोरंगा, उप प्रधान नरेंद्र कोरंगा शामिल थे।
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लगातार हो रही बारिश से दरक रहीं सड़कें 

बागेश्वर जिले में बारिश का सिलसिला जारी है। बीते 24 घंटे में कपकोट में 25 मिमी, गरुड़ में 15 मिमी और बागेश्वर में 7.5 मिमी बारिश रिकार्ड की गई। बारिश के कारण मलबा गिरने से सड़कें बंद हो रही हैं। पहले से बंद सड़कें भी नहीं खुल पाई हैं।

बीते आठ अगस्त से बंद शामा-लीती-गोगिना सड़क में अब तक यातायात बहाल नहीं हुआ है। मंगलवार को सानिगाड़-बास्ती, धपोली-जेठाई, कौसानी-भटरिया, मल्लाडोबा-नौघरस्टेट, रौलियाना-लोहागड़ी, शामा-नाकुरी, बघर, नामती चेटाबगड़ सड़क में यातायात बाधित रहा।  
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