इस हिस्से में पैदल मार्ग पर बनी पुलिया और करीब 40 मीटर हिस्सा पूरी तरह तबाह होने से यहां शीघ्र आवाजाही शुरू होने की उम्मीद नहीं है। लोनिवि के मजदूर यहां भिंडियालीगाड़ पर अस्थायी पुलिया व करीब 400 मीटर लंबा वैकल्पिक रास्ता तैयार करने में जुटे हैं। इसमें करीब दस दिन लगने की बात कही जा रही है। भूस्खलन के मलबे से अवरुद्ध भिंडियालीगाड़ का पानी बड़े बोल्डरों के बीच रिस रहा है। यदि इस बीच जलागम क्षेत्र में अतिवृष्टि होती है, तो यहां झील बनने का खतरा बना हुआ है।
जानकीचट्टी-यमुनोत्री पैदल मार्ग अवरुद्ध होने के कारण एक हफ्ते के लिए यमुनोत्री धाम की यात्रा रोक दी गई है। वैकल्पिक पैदल मार्ग तैयार कराया जा रहा है। इसके तैयार होने के बाद ही यात्रा शुरू की जा सकेगी।
-चतर सिंह चौहान, एसडीएम, बड़कोट।
यमुनोत्री पैदल मार्ग पर भूस्खलन से करीब डेढ़ करोड़ की परिसंपत्तियां ध्वस्त हुई हैं। इस हिस्से में करीब साठ मीटर स्पान की पैदल पुलिया और डेढ़ सौ मीटर हिस्से में कठोर चट्टान काटकर पैदल रास्ता तैयार करने के लिए ढाई करोड़ का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। वैकल्पिक रास्ता बनाने में भी करीब दस दिन लगेंगे।
-एसके गर्ग, ईई, लोनिवि बड़कोट।
बिरही-निजमूला मोटर मार्ग पर रविवार को सुबह करीब साढ़े पांच बजे क्रेन दुर्घटनाग्रस्त होने से चालक की मौत हो गई। क्रेन सड़क पर फंसे ट्राले को सुरक्षित निकालने के लिए गई थी। ट्राले के कारण दिनभर निजमूला सड़क अवरुद्ध रही। निजमूला घाटी में सड़क निर्माण के लिए ट्राले में जेसीबी ले जाई जा रही थी, लेकिन बिरही से करीब दो किमी आगे स्यूरापानी नामक स्थान पर सड़क संकरी होने के कारण ट्राला फंस गया।
ट्राले को सुरक्षित निकालने के लिए बिरही से क्रेन मंगवाई गई, लेकिन कार्य के दौरान क्रेन अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे करीब 50 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। जिसमें चालक कौशल सिंह (26) पुत्र प्रेम सिंह ग्राम-गौंणा, चमोली की मौके पर ही मौत हो गई। राजस्व विभाग व स्थानीय लोगों ने रेस्क्यू कर खाई से शव को निकाला और पोस्टमार्टम के लिए जिला चिकित्सालय भेजा। वहीं, सड़क पर ट्राला फंसने से दिनभर निजमूला घाटी में वाहनों की आवाजाही बाधित रही।
दारमा, तल्ला दारमा चौदास घाटी के 50 से अधिक गांवों को धारचूला मुख्यालय से जोड़ने तवाघाट- सोबला- दारमा सड़क दो माह बाद हल्के वाहनों के लिए खुल गई है। सड़क खुलने से हजारों स्थानीय ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। लंबे समय से बंद सड़क के कारण लोग जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने को मजबूर थे। सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों के जवानों को भी पैदल चलना पड़ रहा था। राशन सहित अन्य जरूरी सामान ले जाने में भी परेशानी उठानी पड़ रही थी।
मूसलाधार बारिश से दो माह पहले तवाघाट-सोबला सड़क ध्वस्त हो गई थी। बीआरओ के पास इस सड़क को खोलने के लिए बजट नहीं था। कुमाऊं आयुक्त ने धारचूला भ्रमण के समय आपदा समीक्षा बैठक में लोनिवि को सड़क खोलने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद लोनिवि ने 14 अगस्त से ही इस मार्ग पर सुरक्षा दीवार निर्माण का कार्य शुरू करा दिया था। शनिवार को दीवार कार्य पूरा होने पर बीआरओ और लोनिवि ने जेसीबी से सड़क पर पड़े मलबे को हटाया।
शनिवार देर शाम लोनिवि के मजदूरों ने मार्ग हल्के वाहनों के लिए खोल दिया। इसके बाद वाहनों की आवाजाही शुरू हुई। अब लोगों के साथ ही सेना को अग्रिम चौकियों पर जाने में दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा। कार्य के निरीक्षण के लिए लोनिवि के ईई आशुतोष और एई जीसी भट्ट लगातार मौके पर बने रहे।
तवाघाट से खेत तक सड़क है खराब
पूर्व जिला पंचायत सदस्य आन सिंह रोकाया और जिला पंचायत सदस्य सुरेश जेठा ने कहा कि फिलहाल सड़क तो खुल गई है, लेकिन तवाघाट से खेत के बीच सड़क की हालत काफी खराब है। धौली नदी की ओर भूमि काफी कमजोर है। इस कारण हर बरसात में एक दो महीने तक सड़क बंद हो जाती है। उन्होंने प्रशासन से सड़क के ऊपरी ओर की कटिंग के लिए बजट उपलब्ध कराने की मांग की है।
14 अगस्त से 70 से अधिक मजदूरों ने लगातार काम कर रहे थे। फिलहाल सड़क हल्के वाहनों के लिए खोल दी गई है। कुछ दिनों के बाद सड़क बड़े वाहनों के चलने लायक हो जाएगी।
- फैजान मलिक,जेई लोनिवि
मार्ग के बंद होने से ग्रामीणों को काफी दिक्कतें हो रही थी। लोनिवि ने शनिवार देर शाम सामान्य आवाजाही के लिए मार्ग को खोल दिया है। अब अन्य खतरनाक जगहों पर भी सड़क को जल्द ही ठीक कर लिया जाएगा।
-अनिल कुमार शुक्ला, एसडीएम