वहीं, मैदानी जिलों में आम, लीची में बौर निकल रहे हैं। निचले क्षेत्रों में गेहूं की फसल पर पक कर तैयार हो चुकी है। जिन किसानों ने गेहूं काट कर खेतों में रखा है। वह बारिश के कारण खराब हो सकती है। प्रगतिशील बागवान प्रेम चंद शर्मा, डीपी उनियाल का कहना है कि ओलावृष्टि से सेब की फसल चौपट हो जाएगी। इस समय सेब की फ्लावरिंग के लिए मौसम साफ होना जरूरी है, तभी सही ढंग से फूल मजबूत हो पाएंगे।
उद्यान निदेशक आरसी श्रीवास्तव का कहना है कि ओलावृष्टि और लगातार तीन-चार दिनों तक बारिश से सेब व अन्य बागवानी फसल को नुकसान होगा। उधर, कृषि निदेशक गौरी शंकर का कहना है कि प्रदेश में अधिकतर किसानों ने गेहूं की कटाई पूरी कर ली है। नवंबर-दिसंबर में जिन क्षेत्रों में गेहूं की बुवाई की गई है। वहां गेहूं की फसल देरी से तैयार होगी। कुछ घंटों के लिए होने वाली बारिश से खड़ी फसल को नुकसान होने की कम संभावना रहती है।