मद्महेश्वर को जोड़ने वाला पैदल पुल बहा, 250 श्रद्धालु फंसे
बारिश और अतिवृष्टि से द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर मंदिर को जोड़ने वाला गौंडार-मद्महेश्वर पैदल मार्ग पर बणतोली के समीप सरस्वती (मोरकंडा) नदी पर बना पुल अतिवृष्टि से बह गया है। पुल के बहने से पैदल मार्ग से लेकर मंदिर तक 250 से अधिक श्रद्धालु फंसे हुए हैं। प्रशासन ने सभी यात्रियों से नदी का जलस्तर कम होने तक वहीं रुकने की अपील है।
बीते रविवार रात दो से सोमवार सुबह सात बजे तक मद्महेश्वर घाटी में भारी बारिश हुई। पांच घंटे तक हुई मूसलाधार बारिश से गाड़-गदेरों के साथ ही मधु गंगा और सरस्वती नदी में मलबा आने से जलस्तर बढ़ गया। इससे सरस्वती नदी पर बना पैदल स्टील गार्डर पुल का एक हिस्सा बह गया। पुल के बहने से द्वितीय केदार मद्महेश्वर का गौंडार गांव सहित तहसील मुख्यालय ऊखीमठ व जिला मुख्यालय रुद्रप्रयाग से संपर्क कट गया है। साथ ही द्वितीय केदार की यात्रा भी ठप हो गई है। वहीं, पुल के दूसरे छोर से लेकर मंदिर तक 250 श्रद्धालु भी फंस गए हैं।
गौंडार के ग्राम प्रधान वीर सिंह पंवार ने बताया कि पुल बहने से द्वितीय केदार से संपर्क टूट गया है। तहसीलदार दीवान सिंह राणा ने बताया कि नायब तहसीलदार जयकृत सिंह रावत के नेतृत्व में एसडीआरएफ और आपदा प्रबंधन की टीम मौके के लिए रवाना हो गई है। वहीं बारिश के बाद मधु गंगा और सरस्वती नदी उफान है। नदियों का जलस्तर बढ़ने से गौंडार गांव के भू-कटाव का खतरा भी बन रहा है।
हेलिकॉप्टर से किए जाएंगे फंसे यात्री रेस्क्यू
गउप जिलाधिकारी जितेंद्र वर्मा ने बताया कि द्वितीय केदार मद्महेश्वर के पैदल मार्ग पर फंसे यात्रियों को रेस्क्यू के लिए हेली कंपनी ट्रांस भारत से संपर्क किया गया है लेकिन खराब मौसम के कारण सोमवार अपराह्न तक हेलिकॉप्टर उड़ान नहीं भर पाया। नदी का जलस्तर कम होने पर वैकल्पिक व्यवस्था कर फंसे यात्रियों को सुरक्षित निकालने के इंतजाम किए जाएंगे।