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Dehradun News: बरसात में गीले कपड़े पहनने से त्वचा रोग के बढ़ रहे मामले

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मानसून सीजन में उप जिला अस्पताल विकासनगर के जनरल ओपीडी में त्वचा रोग के 20 से 25 मरीज प्रतिदिन आ रहे हैं। अधिकतर त्वचा रोग के मामले कवक या मिश्रित संक्रमण के हैं। इनमें शरीर पर दाद, खाज, खुजली और दाने उभरना जैसे मामले शामिल हैं। गौर करने वाली बात यह है कि अधिकतर मरीज गीले कपड़े पहनने, गीले तौलिए या रुमाल के बार-बार प्रयोग के कारण त्वचा रोग की चपेट में आए हैं। फिजिशियन ने लोगों से जरूरी एहतियात बरतने की सलाह दी है।उप जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. उमंग नौटियाल बताते हैं कि सामान्य तौर पर मानूसन सीजन में त्वचा रोग के मामलों में बढ़ोत्तरी होती है। उन्होंने बताया कि मानसून सीजन में वातावरण में सामान्य से अधिक नमी होती है। इस दौरान कपड़ों और तौलियों को सूखने में सामान्य से अधिक समय लगता है। कई लोग लापरवाही बरतते हुए गीले कपड़े पहन लेते हैं। गीले तौलिए या रुमाल का भी प्रयोग करते हैं। कपड़ों में नमी बने रहने से उस पर कवक और जीवाणु पैदा होने लगते हैं। ऐसे में उन्हें प्रयोग करने वाला व्यक्ति कवक या मिश्रित संक्रमण की चपेट में आ जाता है। डॉ. उमंग नौटियाल बताते हैं कि बरसात के मौसम में जल्दी सूखने वाले और हवादार सूती वस्त्र पहनने चाहिए। पूरी तरह से सूखने के बाद ही तौलिए और रुमाल का प्रयोग करना है। बच्चे, वृद्ध और गंभीर बीमार सबसे पहले संक्रमण की चपेट में आते हैं। उनके कपड़ों को बदलने और सफाई पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। अगर बच्चाें और वृद्धों को मामूली संक्रमण है तो डस्टिंग पाउडर का प्रयोग करें। समस्या बढ़ने पर तुरंत चिकित्सक को दिखाएं।
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