जौनसार-बावर में सामाजिक सुधार और विवाह समारोहों में होने वाली फिजूलखर्ची को रोकने के लिए मुहिम लगातार जोर पकड़ रही है। शुक्रवार को खरोड़ा और कुताड़ गांव के ग्रामीणों ने एक अहम पंचायत कर महिलाओं के आभूषणों की संख्या सीमित करने का ऐतिहासिक फैसला लिया। अब शादी-विवाह, मेले-त्योहारों या अन्य सामाजिक आयोजनों में महिलाएं केवल तीन पारंपरिक गहने ही पहन सकेंगी। नियम तोड़ने वाले परिवार पर 25 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया जाएगा। स्याणा चंद्रदत्त डिमरी की अध्यक्षता में हुई ग्रामीणों की संयुक्त बैठक में विवाह समारोहों में बढ़ते आभूषणों के दिखावे और परिवारों पर पड़ने वाले भारी आर्थिक दबाव पर चिंता जताई गई। पंचायत में सर्वसम्मति से तय हुआ कि अब से महिलाएं नाक में सोने की फुल्ली, कानों में झुमके और गले में केवल मंगलसूत्र ही पहनेंगी। इसके अलावा किसी भी अन्य भारी आभूषण को पहनने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। खास बात यह रही कि बैठक में मौजूद महिलाओं ने भी इस फैसले का पुरजोर समर्थन किया और माना कि इससे आयोजनों में सादगी आएगी और अमीरी-गरीबी का भेद खत्म होगा। बैठक में साधीराम डिमरी, भगतराम, संतराम, मेहर चंद, दयाराम, ग्यारू, सुरेश, हरीश, रूपराम और नरेंद्र सहित कई ग्रामीण मुख्य रूप से मौजूद रहे।