देहरादून। ऐपण कला उत्तराखंड की पारंपरिक धरोहर है। इसे जीवित रखने और आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी हम सबकी है। भातखंडे हिन्दुस्तानी संगीत महाविद्यालय में ऐपण कार्यशाला के समापन अवसर पर निदेशक संस्कृति विभाग बीना भट्ट ने यह बात कही। उन्होंने कार्यशाला की प्रतिभागी महिलाओं को प्रमाण पत्र वितरित कर सम्मानित भी किया।
डालनवाला स्थित महाविद्यालय परिसर में 15 दिवसीय ऐपण कार्यशाला का समापन मंगलवार 11 फरवरी को हुआ। बीना भट्ट ने बताया कि पारंपरिक धरोहर लोक कला ऐपण को बड़े स्तर पर पहचान दिलाने, कला के संरक्षण व संवर्द्धन और इसे महिलाओं की आर्थिकी से जोड़कर उन्हें समृद्ध करने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग ने कार्यशाला का आयोजन किया। उन्होंने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा के आयोजित कार्यशाला में अल्मोड़ा निवासी मीरा जोशी ने 20 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया। समापन अवसर पर प्रतिभागियों ने आकर्षक ऐपण बनाए। इसकी निदेशक व अन्य दर्शकों ने खूब सराहना की। उन्होंने कहा कि पारंपरिक लोक कलाओं को आर्थिकी से जोड़कर उनका संरक्षण किया जा सकता है। इससे नए कलाकार भी इन कलाओं को सीखने के लिए आगे आएंगे। इस अवसर पर कार्यशाला समन्वयक बलराज नेगी, पूनम रावत, निकिता, सुनीता जैन, लीला देवी, सविता चौरे, विनीता शर्मा, रेखा भट्ट, रानू बिष्ट, अरूणा गर्ग, मंजू पांडे, रीतू अग्रवाल, तनिष्का, महिमा पंवार, सुनीता काला, रानी जयसवाल, मीनाक्षी भट्ट, बबीता लोहनी, खुशी, आरती आदि महिलाएं मौजूद रहीं।