कोरोना संकट के कारण लोग इस बार पानी के बिलों में राहत की उम्मीद लगाए बैठे थे। खासकर होटल, रेस्टोरेंट, इंडस्ट्री वाले यह मान कर चल रहे थे कि अगर बिल माफ नहीं किए गए तो कम से कम दरों में बढ़ोतरी तो नहीं होगी।
आम लोग भी यही उम्मीद कर रहे थे। लेकिन उपभोक्ताओं की उम्मीद धरी की धरी रह गई। उपभोक्ता बीरू बिष्ट ने कहा कि जल संस्थान से बिलों में राहत देने की मांग की गई थी लेकिन इस मांग को अनसुना कर दिया गया है।
जल संस्थान को पानी की दरों में हर साल 15 प्रतिशत बढ़ोतरी का अधिकार है। इस बार भी घरेलू में नौ से 11 प्रतिशत और व्यवसायिक में 13 से 15 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की गई है। शासन से दरों को यथावत रखने का कोई आदेश भी नहीं था।
-निलिमा गर्ग, महाप्रबंधक जल संस्थान