रुड़की शहर में कूड़े से बिजली बनाने वाले प्लांट को लगाने को लेकर काफी हद तक रास्ता साफ हो गया है। 1800 करोड़ की लागत से स्थापित होने वाले ‘वेस्ट टू एनर्जी प्लांट’ के लिए केंद्रीय पर्यावरण एवं शहरी विकास मंत्रालय ने योजना को मंजूरी दे दी है। प्लांट से पैदा होने वाली बिजली को सरकार खरीदकर उपभोक्ताओं को बेचेगी।
स्वच्छ भारत अभियान के तहत रुड़की शहर में कूड़े से बिजली बनाने वाले प्लांट को लगाया जाना है। प्लांट लगाने की जिम्मेदारी जर्मन कंपनी को सौंपी गई थी। लेकिन, केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय और केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की ओर से अनुमति नहीं मिलने की वजह से योजना लटकी हुई थी।
अब केंद्र सरकार ने योजना को मंजूरी दे दी है। सिडकुल महाप्रबंधक एसएस सेमवाल ने बताया कि ‘वेस्ट टू एनर्जी’ प्लांट की स्थापना को लेकर सिडकुल और रुड़की नगर निगम के बीच समझौता भी हो चुका है। नगर निगम प्लांट के लिए दस बीघा जमीन मुहैया कराने पर राजी हो चुका है।
‘अल्ट्रा हाई टेंपरेचर गेसीफिकेशन हाइड्रोलिसिस’ तकनीक पर आधारित प्लांट से एक दिन में 43 मेगावाट बिजली पैदा होगी। जबकि प्लांट में एक दिन में 550 मीट्रिक टन कूड़े का शोधन किया जाएगा।
दिलचस्प पहलू यह भी है कि इन महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने पर रुड़की, हरिद्वार, देहरादून, ऋषिकेश और उत्तरकाशी जैसे पांच बड़े शहरों में कूड़े के निस्तारण की समस्या का समाधान हो जाएगा। इन सभी शहरों से प्रतिदिन निकलने वाला कूड़ा करकट का इस्तेमाल ‘वेस्ट टू एनर्जी’ प्लांट में किया जाएगा।