इस मामले की कलई आर्बिट्रेशन से पारित आदेशों से हुई। जब प्रकरण शासन में पहुंचा तो इसकी जांच कराई गई। पता चला कि 3,65,808 रुपये की अवशेष राशि को लेकर कंपनी आर्बिट्रेशन में गई और अब तक अवार्ड की धनराशि और 18 प्रतिशत ब्याज को जोड़कर कुल धनराशि में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है।
हालांकि गोपेश्वर प्रांतीय खंड की ओर से ये बताया गया कि कंपनी को जो अग्रिम भुगतान हुआ, उसके एवज में विभाग ने उसकी 39.42 लाख रुपये लागत की पुल निर्माण की सामग्री कब्जे में ले रखी है और कंपनी पर 3,65,808 रुपये देने शेष थे, जिसके लिए वो आर्बिट्रेशन में चली गई। आर्बिट्रेशन में मामला चलता रहा। एक मई 2016 को घोषित अवार्ड के अनुसार, कंपनी को दिए गए अग्रिम भुगतान को समायोजित करते हुए अब तक कुल खर्च 59,73,144 रुपये हो चुका है। गत 16 अप्रैल तक आर्बिट्रेशन में 22 बार सुनवाई की तारीखें तय हो चुकी हैं।
ये इंजीनियर प्रथम दृष्टया दोषी
वीरेंद्र जौहरी, तत्कालीन सहायक अभियंता, ओम प्रकाश, तत्कालीन अधिशासी अभियंता, रमेश चंद्र पाल, तत्कालीन अधिशासी अभियंता, एसएस तोमर तत्कालीन अधिशासी अभियंता, फिरोज अहमद तत्कालीन अपर सहायक अभियंता, नवीन ध्यानी तत्कालीन कनिष्ठ अभियंता, राजेंद्र कुमार चौधरी तत्कालीन कनिष्ठ अभियंता। इन सभी अभियंताओं को आरोप पत्र गठित कर शासन को भेजे गए हैं।