अपर निदेशक पशुपालन पीसी कांडपाल ने बताया कि 2018 से मार्च 2019 तक 88 घोड़ों के सैंपल लिए गए थे। इन्हें जांच के लिए राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार भेजा गया था। सभी रिपोर्ट निगेटिव आई थी। अपर निदेशक कांडपाल ने बताया कि ऊधमसिंह नगर, पिथौरागढ़ जिले ग्लैंडर्स रोग के लिए संवेदनशील हैं। उन्होंने कहा कि कुमाऊं के सभी सीवीओ को घोड़ों पर नजर रख सैंपलिंग कराने को कहा गया है। वन संरक्षक पश्चिमी वृत्त डॉ. पराग मधुकर धकाते ने कहा कि बरेली में घोड़ों, खच्चरों में फैले ग्लैंडर्स रोग को देखते हुए अलर्ट जारी किया गया है।
ग्लैंडर्स इंसानों के लिए जानलेवा
घोड़ों में होने वाली ग्लैंडर्स बीमारी लाइलाज है। बीमार घोड़ों के संपर्क में रहने से यह बीमारी मनुष्य को भी हो सकती है। इस बीमारी से पीड़ित घोड़े या मनुष्य की मौत तक हो जाती है। बीमार पशु के मुंह, नाक से निकलने वाले तरल पदार्थ के संक्रमण से यह बीमारी दूसरे पशुओं या इंसानों में भी फैल सकती है।
- बीमार पशु की तत्काल जांच कराना चाहिए।
- स्वस्थ पशुओं को बीमार पशु से अलग रखना चाहिए।
- बीमार जानवर को चारा-पानी अलग देना चाहिए।
हल्द्वानी में सबसे अधिक खच्चर
गौला नदी में ही करीब 500 से अधिक खच्चरों से खनन होता है। वहीं अन्य काम भी खच्चर और घोड़ों से लिया जा रहा है। हल्द्वानी के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. डीसी जोशी के अनुसार हल्द्वानी शहर, आसपास करीब 800 से अधिक खच्चर होंगे।