प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने कहा कि वक्फ बोर्ड के असीमित अधिकारों को सीमित करते हुए, संविधान के दायरे में लाना जरूरी था। क्योंकि कांग्रेस की सरकारों ने वोट बैंक के लालच में वक्फ कानून को जमीन अधिग्रहण का एक काकस तैयार कर दिया था। 2013 के संशोधन के बाद 2014 चुनावों में लाभ लेने के लिए दिल्ली की प्राइम लोकेशन की 113 संपत्ति बोर्ड के सरमायेदारों को दे दी थी। भाजपा सरकार ने इस कानून में संशोधन कर इसे पुनः संविधान के दायरे में ला दिया है।
अब इनके किसी भी जमीन कर हाथ रखने से उनकी संपत्ति नहीं होगी। पीड़ित न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है। कांग्रेस सरकार ने ये अधिकार भी आम लोगों से छीन लिया था। उन्होंने कहा कि महज मुस्लिम समाज के ठेकेदार इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस कानून के अस्तित्व में आने के बाद देवभूमि में भी पहले से जारी अवैध कब्जों को खाली करने की हमारी कार्रवाई अधिक तेज हो जाएगी।