इस दौरान रंजीत ने चुपके से अपने हैंडी स्कीमर (हाथ में रखा जाने वाली कैमरे वाली मशीन) में भी इस डेबिट कार्ड को स्वैप कर लिया। इस तरह डेबिट कार्ड का डाटा स्कीमर में सेव हो गया और कार्ड का पिन उसने सिमरनजीत को मशीन में फीड करते हुए देख लिया था। इसके अगले दिन ही वह दिल्ली चला गया। वहां आयुष, रोहित और रंजीत ने पैसे निकालकर आपस में बराबर बराबर बांट लिए।
ऑनलाइन मंगाया स्कीमर
आयुष ने अपने उस्ताद विक्की से सब कुछ सीख लिया था। इसके लिए उसे जरूरत थी कार्ड रीडर और स्कीमर की। यह सब उसने ऑनलाइन मंगा लिया। यही नहीं दिल्ली के एक मार्केट से उसने ब्लैंक डेबिट कार्ड भी खरीद लिए और एक सॉफ्टवेयर के माध्यम से क्लोन तैयार कर लिया।
ठगी से बचने के लिए डेबिट व क्रेडिट कार्ड से खरीददारी करते वक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। यह सावधानी आपको स्वैप करने वाले कर्मचारी की गतिविधियां देखकर बरतनी चाहिए। दुकानों, रेस्टोरेंट, होटल, पेट्रोल पंप आदि पर पीओएस (प्वाइंट ऑफ सेल ) मशीन से भी यह गड़बड़ झाला किया जा सकता है।
-जिस वक्त डेबिट कार्ड स्वैप करें तो पिन खुद ही डालें, कोई कर्मचारी पूछे तो मना कर दें।
-पिन डालते वक्त देख लें कि ऊपर कोई कैमरा तो नहीं है। यदि हो तो थोड़ा दूर चलें जाएं।
-स्वैप करने के बाद पिन तत्काल डालें, ताकि मशीन हैंग न हो पाए।
-किसी कर्मचारी को अपना डेबिट कार्ड न दें, वह रंजीत की भांति आपका डाटा चुरा सकता है।
-सिर्फ पीओएस पर ही कार्ड स्वैप करें, किसी छोटी पॉकेट साइज मशीन में स्वैपिंग से बचें।
-ये मशीनें दिखने में एक कैलकुलेटर जैसी होती हैं, यदि उन पर बैंक का लोगो नहीं है तो इसके बारे में पूछताछ करें।