मानवीय गतिविधियां बंद होने की वजह से वायुमंडल में कार्बन डाईऑक्साइड समेत हानिकारक गैसों की मात्रा में भारी कमी आई है। जिसका प्रभाव ग्लेशियरों के पिघलने से लेकर नदियों के जल की गुणवत्ता पर भी पड़ा है। ऐसे में इन तमाम पहलुओं के अध्ययन की जरूरत है।
निदेशक डॉ. साईं ने बताया कि वैज्ञानिकों की टीमें ग्लेशियर, भूस्खलन, नदियों के जल की गुणवत्ता का अध्ययन करेंगी। अध्ययन के बाद इसकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी जिसे केंद्र सरकार को भी भेजा जाएगा। फिलहाल वैज्ञानिक अपने घरों में ही रहकर उपलब्ध डाटा का अध्ययन कर रहे हैं।