2022 में एसटीएफ को सौंपी थी जांच
इसके बाद अगस्त 2022 में विजिलेंस से जांच हटाकर एसटीएफ को सौंप दी गई। एसटीएफ ने जांच के बाद आठ मार्च को मामले में आयोग के पूर्व अध्यक्ष आरबीएस रावत, सचिव मनोहर कन्याल और पूर्व परीक्षा नियंत्रक राजेंद्र पोखरिया को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
आरोपी पूर्व परीक्षा नियंत्रक राजेंद्र पोखरिया की ओर से अपने अधिवक्ता के माध्यम से विजिलेंस की स्पेशल कोर्ट में जमानत के लिए याचिका दायर की गई थी। याचिका में आरोपी का कहना था कि उसका अपराध से कोई लेना देना नहीं है। उसके खिलाफ कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराए हैं।
उसे केवल विवेचना के दौरान झूठे गवाह संकलित कर मात्र बयानों के आधार पर आरोपी बनाया गया है। बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष के तर्कों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने अपराध को गंभीर प्रवृति का बताया। कहा कि आरोपी के इस कृत्य से आयोग को संदेह की दृष्टि से देखा जाने लगा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को जमानत देने का कोई पर्याप्त आधार नहीं है।