उत्तराखंड के चुनावी दंगल में सियासत का चाहे कोई कितना भी बड़ा ‘दबंग’ क्यों न रहा हो, मगर उसे धुला चटाने वाला असल ‘सुल्तान’ तो वोटर ही है।
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चुनावी इतिहास के पन्नों में कई ऐसे दिलचस्प और रोमांचक मुकाबले दर्ज हैं, जिनके नतीजों ने चुनाव में चित होने वाले सूरमाओं को ही नहीं, बल्कि राजनीति के रणनीतिकारों को भी अचंभे में डाल दिया। चुनावी समर में उतरे दिग्गज नेता हरीश रावत रहे हों या सतपाल महाराज या फिर डॉ. हरक सिंह रावत, ऐसे तमाम राजनेताओं को अतीत में हुए कई चुनाव में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। दिग्गजों की पराजयों का यही इतिहास सियासी दलों की घबराहट की एक बड़ी वजह माना जा रहा है।
राज्य के 74.95 लाख वोटरों के मन की थाह लेना आसान काम नहीं है। बेशक भाजपा और कांग्रेस सत्ता पर काबिज होने का दावा कर रही हैं, मगर जनता के मन में क्या है, ये कोई नहीं जानता। 2012 के चुनाव में भाजपा के 31 विधायकों की चुनावी नैया पार लगाने वाले पूर्व सीएम बीसी खंडूड़ी कोटद्वार में चुनाव हार गए। इससे पहले खंडूड़ी 1996 में गढ़वाल सीट से लोस का चुनाव हारे थे।
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देहरादून कैंट से दावेदारी कर रहे हरबंस कपूर अपनी अजेय गाथा के लिए मशहूर हैं। मगर 1985 में देहरादून का वोटर उन्हें भी एक बार जमीन सुंघा चुका है। सतपाल महाराज और विजय बहुगुणा भी राज्य की सियासत के बड़े नाम हैं और इन दोनों दिग्गजों के खाते में भी हार दर्ज हुई है। बहुगुणा 1998, 1999 और 2004 का लोकसभा चुनाव हारे तो महाराज को भी जनता जनार्दन ने 1998 और 1999 के चुनाव में जमीन सुंघाई। हरीश रावत के नाम तो संसदीय चुनाव में पराजय की हैट्रिक का रिकॉर्ड दर्ज है। वह 1996, 1998 और 1999 में चुनाव हारे। इनमें से कई दिग्गजों की पराजय अप्रत्याशित रही और छुपे रुस्तम वोटरों ने तमाम पूर्वानुमानों को ध्वस्त कर दिया।
दिग्गज जो लोस और विस चुनाव हारे
बीसी खंडूड़ी-1996, 2012
हरीश रावत-1996, 1998, 1999
विजय बहुगुणा-1998, 1999, 2004
सतपाल महाराज-1998, 1999
डॉ. हरक सिंह रावत-1996
यशपाल आर्य-1991,1996
सुरेन्द्र सिंह नेगी-1996, 2007
प्रीतम सिंह- 1991, 1996
डॉ. इंदिरा हृदयेश-2007
दिनेश अग्रवाल-1993,1996
नवप्रभात-1996, 2007
दिनेश अग्रवाल-1993, 1996
बंशीधर भगत-2002
हीरा सिंह बिष्ट-1989, 1989, 2007, 2012
डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक-2002
मुन्ना सिंह चौहान-1993, 2002, 2009, 2012
बिशन सिंह चुफाल-1989
काशी सिंह ऐरी-1996, 2007, 2012
हरबंस कपूर-1985
इस बार ये दिग्गज मैदान में
कांग्रेस के दिग्गज नेता व सीएम हरीश रावत किच्छा और हरिद्वार ग्रामीण से नामांकन कर चुके हैं। सतपाल महाराज भाजपा के टिकट पर चौबट्टाखाल सीट से मैदान में हैं। जनरल खंडूड़ी के लिए ‘वाटर लू’ साबित हुए कोटद्वार से भाजपा के डॉ. हरक सिंह रावत और कांग्रेस के सुरेन्द्र सिंह नेगी के बीच मुकाबला है।
खंडूड़ी मैदान में नहीं हैं, लेकिन उनकी बेटी चुनाव लड़ रही हैं। यशपाल आर्य, इंदिरा, हरबंस कपूर, नवप्रभात, प्रीतम सिंह, काशी सिंह ऐरी, हीरा सिंह बिष्ट और मुन्ना सिंह चौहान सरीखे कई बड़े चेहरे इस बार भी मैदान में ताल ठोक रहे हैं। वहीं, सियासी हवाओं में फिर वही सवाल तैर रहा है कि आखिर वोटरों ने ऐसे तमाम दिग्गजों के भाग्य के बारे में क्या सोच रखा है?