जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी ने कहा कि धर्मांतरण से व्यक्ति अपनी मूल प्रकृति, संवेदनाओं, सत्ता व स्वभाव से विरत हो जाता है। इसलिए किसी की भी संवेदनाओं व भावनाओं को आहत नहीं करना चाहिए। परमार्थ आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद मुनि ने कहा कि काफी दिनों से कई विषय चल रहे हैं। इसमें धर्मांतरण अपने आप में एक विवाद का विषय है। धर्मांतरण नहीं होना चाहिए। सबकी अपनी-अपनी आस्था है और अपना-अपना विषय है। लालच के बल पर तो धर्मांतरण बिल्कुल नहीं होना चाहिए।
उन्होंने यूपी में जुमे की नमाज वाले दिन हुई हिंसा पर चिंता व्यक्त की और कहा कि जुमे की नमाज जिम्मेदारी की नमाज होती है, नमाज के बाद पत्थरबाजी बहुत गलत है। लोगों को संविधान का पालन करना चाहिए। शरीयत के साथ-साथ शराफत का पालन भी करना चाहिए।
हरि सेवा आश्रम के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद ने कहा कि आज जो परिवार हैं उनमे न शिक्षा तो है और न ही संस्कार। परिवारों में संस्कारों की कमी आ रही है। इसलिए सबको मिलकर शिक्षा के साथ संस्कारों को भी जोड़ना होगा। उन्होंने कहा कि ज्ञानवापी धरोहर है। इसलिए इसे सहर्ष वापस कर देना चाहिए। केरल से आए स्वामी शक्ति शांतानंद सहित धर्माचार्यों ने समान नागरिक संहिता, धर्मांतरण के विरोध में सख्त कानून बनाने की मांग की साथ ही हिंदू मठ-मंदिरों को वापस करने की सरकार से मांग की।