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देखिए, कैसे फर्जी अफसर को मिला VIP ट्रीटमेंट

Tue, 08 Dec 2015 03:31 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. सदानंद दाते ने अपने साथ फोटो खिंचवाने की मांग करने वाले इंडियन रेवन्यू सर्विस के फर्जी अफसर को गिरफ्तार करवा दिया।
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डालनवाला कोतवाली में उसके खिलाफ केस दर्ज कर नीली बत्ती लगी कार कब्जे में ले ली है। सोमवार को आरोपी को जेल भेज दिया गया। आरोपी ने पुलिस के कई बड़े अधिकारियों के नामों का खुलासा किया, जिनसे वह वीआईपी ट्रीटमेंट ले चुका है। कई आला अफसरों से उसके नजदीकी रिश्ते थे, लेकिन उन्हें कभी उस पर शक नहीं हुआ।

इनकम टैक्स का डिप्टी डायरेक्टर बताकर राजीव शर्मा निवासी गोविंद अपार्टमेंट जगन्नाथपुरी कालोनी मथुरा (वर्तमान पता, मोहित नगर देहरादून) दो दिन पहले वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. सदानंद दाते से मिला था। अन्य अफसरों और विभागीय कार्यशैली बताकर एसएसपी को प्रभावित भी कर लिया।
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इसके बाद राजीव शर्मा अन्य अधिकारियों के साथ मुलाकात की फोटो एसएसपी को दिखाने लगा। अचानक राजीव ने एसएसपी संग फोटो खिंचवाने की पेशकश की। इस पर कप्तान दाते का माथा ठनका। हालांकि उन्होंने शर्मा को जाने दिया। इसके बाद संबंधित अधिकारियों से राजीव शर्मा के बारे में जानकारी एकत्र की और सिविल सर्विसिज के 2008 और 2009 बैंच की सूची खंगाली तो उसका नाम नहीं मिला।

खुफिया तंत्र से जांच कराई गई तो सच सामने आ गया। एसएसपी के निर्देश पर डालनवाला इंस्पेक्टर अनिल जोशी ने नीली बत्ती लगाकर घूम रहे फर्जी इनकम टैक्स अधिकारी राजीव शर्मा को दबोच लिया। उसके पास से पासपोर्ट, मुहरें और ड्राइविंग लाइसेंस बरामद हुए हैं।

अफसर के इशारे पर फाइव स्टार होटल
आरोपी राजीव शर्मा का कहना है कि फरवरी में शादी की सालगिरह पर हरिद्वार में पुलिस के एक अफसर के कहने पर उन्हें फाइव स्टार होटल में परिवार के लिए कमरा मिला था, जहां पर एक पुलिस अधिकारी भी उन्हें बधाई देने पहुंची थी। आरोपी के मोबाइल में यूपी और उत्तराखंड के कई पुलिस, प्रशासन और सचिवालय अधिकारियों से मुलाकात के फोटोग्राफ है।

एसएसपी ने बताया कि आरोपी को इनकम टैक्स विभाग के बारे में काफी जानकारी थी। बता दे कि आरोपी देहरादून में अपनी बहन के यहां रहता था। ओएनजीसी से सेवानिवृत्त हुई शर्मा की बहन एक यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं।

सपना पूरा नहीं हुआ तो बना फर्जी अधिकारी
आगरा से एमएससी करने वाले राजीव शर्मा का कहना है कि वह तीन बार सिविल सर्विसेज की परीक्षा में बैठा, तीसरी बार तो वह इंटरव्यू तक पहुंचा था, लेकिन दुर्भाग्य से उसका चयन नहीं हो पाया।

साल 2008 में मां की तबीयत खराब होने से परिवार को लेकर देहरादून में बहन के पास आ गया था, तब से यहां रह रहा था। आरोपी का कहना है कि बीवी के नाम पर खरीदी गई कार पर एक साल पहले बत्ती लगाई थी। उसके पिता रेलवे विभाग से सेवानिवृत्त हुए थे।
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नेट से जानी आयकर विभाग की बारीकियां
फर्जी अधिकारी बनकर यूपी और उत्तराखंड में दबदबा दिखाने वाली राजीव शर्मा का कहना है कि नेट के जरिए आयकर विभाग की बारीकियों का अध्ययन किया।

वह फर्जी अफसर बनकर मिलता तो जरूर रहा हो, लेकिन किसी से कोई नाजायज काम नहीं कराया। राजीव को उसकी पत्नी ने इस फर्जीवाड़े के खिलाफ काफी समझाया था, पर उसपर अफसर बनने का भूत सवार था।
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