उत्तराखंड की ताजी वोटर लिस्ट चिंता पैदा करती है। लिस्ट में पौड़ी और अल्मोड़ा संसदीय क्षेत्रों में पुरुषों के मुकाबले महिला वोटरों की संख्या कम हो गई है।
पंचायत और शहरी निकायों चुनावों पर पड़ेगा असर
पहले दोनों सीटों पर महिलाओं मतदाताओं का अनुपात पुरुषों से ज्यादा था। लोकसभा चुनाव के अलावा इसका असर त्रिस्तरीय पंचायत और शहरी निकायों चुनावों पर भी पड़ेगा।
वैसे दूसरी सीटों पर भी महिला वोटरों की संख्या पुरुषों के मुकाबले कम रफ्तार से बढ़ी जिससे दोनों के बीच फासला बढ़ता जा रहा है। पौड़ी गढ़वाल पर्वतीय सीट है।
2004 में इस सीट पर महिला मतदाताओं की संख्या 542757 थीं और पुरुष मतदाता 509264 थे। यहां महिला मतदाता पुरुषों की अपेक्षा 33 हजार ज्यादा थीं। 2004 में 33 हजार का यह फासला घटकर 28 हजार पर खिसक गया।
लेकिन 2014 की निर्वाचक नामावली ने होश उड़ा दिए। इस सीट पर अब 592082 महिला और 612476 पुरुष मतदाता हैं। यानि अब पुरुष मतदाताओं की संख्या महिलाओं से लगभग बीस हजार ज्यादा हो गई है।
लगातार बढ़ रहा अंतर
अल्मोड़ा भी विशुद्ध रूप से पर्वतीय सीट है। 2004 के लोकसभा चुनाव की मतदाता सूची के आधार पर महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों के मुकाबले 52 हजार अधिक थी। 2009 में यह फासला 29 हजार पर आ गया।
और, 2014 के लोकसभा चुनाव की मतदाता सूची में महिलाओं के सापेक्ष पुरुष मतदाताओं की संख्या 17 हजार से भी ज्यादा हो गई। राज्य में 2004 में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों के सापेक्ष 9 हजार कम थी।
2009 में यह अंतर बढ़कर 15 हजार हो गया। और, 2014 के लोकसभा चुनाव की मतदाता सूची में पुरुष मतदाताओं की संख्या महिलाओं से सवा तीन लाख ज्यादा हो गई।
आयोग की मुहिम के तहत 31 जनवरी को मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद एक फरवरी से 12 मार्च तक 2014 तक राज्य में लगभग तीस हजार नए मतदाता बने।