वीआईपी और मंत्रियों की सुरक्षा में पुलिस के कंडम वाहन दौड़ रहे हैं। यह वाहन कब बड़ी दुर्घटना का कारण बन जाएं, कुछ कहां नहीं जा सकता।
मुख्यमंत्री की सुरक्षा घेरे में शामिल पीएसी बस के ब्रेक फेल होने की घटना को भी वाहनों के खस्ता हाल से जोड़ा जा रहा है। पुलिस महकमे में कंडम वाहनों की संख्या 345 को पार कर गई है, लेकिन 178 वाहन ऐसे है, जिनका उपयोग सुरक्षा और कानून की व्यवस्था की ड्यूटी में किया जा रहा हैं।
पुलिस महकमे में वाहनों की कमी और खस्ता हालत पर कैग की रिपोर्ट में फोकस किया गया है। मानकों के मुताबिक पुलिस के लिए वाहनों की कमी शून्य होनी चाहिए। विभाग द्वारा 2011 से लेकर 2016 के बीच 8.72 करोड की लागत से करीब 413 वाहन खरीदे गए। पुलिस को 2178 वाहनों की जरूरत है, लेकिन 1577 वाहन उपलब्ध हैं। इनमें 212 भारी, 191 मध्यम, 537 हल्के, 577 मोटर साइकिल शामिल हैं।
सूत्रों की मानें तो वाहनों की कमी के अतिरिक्त 32 प्रतिशत वाहन ऐसे हैं, जो तय समय-सीमा पुरी कर कंडम वाहनों की श्रेणी में पहुंच चुके हैं। पुलिस के करीब 345 वाहन कंडम हैं, जिनमें से 178 वाहन तो ऐसे है जिनका प्रयोग कानून व्यवस्था और वीआईपी ड्यूटी में किया जा रहा है। पुलिस थानों और चौकी के वाहनों की खस्ता हालत किसी से छिपा नहीं है। यह वाहन कब धोखा दे जाएं, कुछ नहीं कहा जा सकता है।
मजबूरी में पुलिस उन्हें चला रही है। कैबिनेट मंत्रियों के एस्कार्ट में चलने वाले अधिकांश वाहन भी ऐसे ही हैं। यही वजह है कि अधिकारियों को आए दिन मंत्रियों की नाराजगी झेलनी पड़ रही है। नए वाहनों को लेकर प्रस्ताव तो अनगिनत भेजे गए, लेकिन हर बार वित्तीय संकट बताकर उन्हें फाइलों में दबा दिया गया।
40 वाहनों का बजट तो है, स्वीकृति नहीं
एक ओर पुलिस वाहनों के संकट से जूझ रही है तो दूसरी ओर बजट होते हुए भी नए वाहन नहीं खरीद पा रही है। चार माह के बजट में पुलिस महकमे के हिस्से में तीन करोड़ 90 लाख रुपये आए थे। पुलिस मुख्यालय ने इस बजट में चालीस वाहनों की खरीद का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा था।
इनमें प्रदेश के 12 मंत्रियों की एस्कार्ट के लिए 12 जिप्सी, पीएसी के छोटी-बड़ी आठ गाड़ियां, सात ट्रक, बंदियों को लाने ले जाने में प्रयुक्त होने वाले आठ बड़े वाहन शामिल हैं। दो स्कार्पियो भी खरीदी जानी हैं। शासन को इन वाहनों की खरीद में कोई अतिरिक्त बजट नहीं देना है, लेकिन स्वीकृति की औपचारिकता को दो माह से लटकाया जा रहा है। पुलिस मुख्यालय मंत्रियों से लेकर शासन के अफसरों के संज्ञान में यह मामला ला चुका है, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा है।
निसंदेह पुलिस विभाग में वाहनों का संकट है। इस बार के बजट में सरकार से पुलिस को काफी कुछ मिलने की उम्मीद है। करीब 250 नए वाहन खरीदे जाने का प्रस्ताव है, जबकि 40 नए वाहन खरीदे जाने की प्रक्रिया चल रही है।
- एमए गणपति, पुलिस महानिदेशक