फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तराखंडः मरीजों को भारी फजीहत, न डॉक्टरों ने किया इलाज, न हुई पैथोलॉजी की जांच

Tue, 18 Jun 2019 10:27 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

देहरादून जिले सहित राज्यभर में में सोमवार को मरीजों को भारी फजीहत झेलनी पड़ी। न तो निजी डॉक्टरों ने उनका इलाज किया और न ही पैथोलॉजी सेंटरोें में उनकी जांच हुई। पश्चिम बंगाल में डॉक्टर के साथ हिंसा के विरोध और देश में डॉक्टरों की सुरक्षा के सख्त कानून की मांग को लेकर जिले में लगभग 2000 निजी डॉक्टर हड़ताल पर रहे। नर्सिंग होम में भर्ती मरीजों का इलाज तो हुआ, लेकिन नए मरीजों को इलाज नहीं मिला। पैथोलॉजी सेंटर बंद रहने की वजह से मरीजों की जांच भी अटकी रही।

विज्ञापन


भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) के आह्वान पर हुई इस हड़ताल में दो घंटे का साथ सरकारी डॉक्टरों ने भी दिया। सुबह आठ बजे से 10 बजे तक जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में सरकारी डॉक्टरों ने ओपीडी का बहिष्कार किया। इस दौरान सरकारी अस्पतालों में आम दिनों की अपेक्षा भीड़ जमा हो गई। सरकारी और निजी दोनों तरह के अस्पतालों में इमरजेंसी में मरीज देखे गए। अस्पतालों में ऑपरेशन किए गए और अन्य क्रिटिकल बीमारियों का इलाज भी जारी रहा। आईएमए के जिला शाखा अध्यक्ष डॉ. संजय गोयल ने बताया कि इस दौरान जो मरीज अस्पतालों या नर्सिंग होम में आए उनके सामने डॉक्टरों ने अपनी बातों को रखा। इस हड़ताल के वाजिब कारणों को मरीजों को बताया गया और उनसे सहयोग की अपील की गई। उन्होंने बताया कि देश में डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए कानून बेहद आवश्यक है, जिसकी मांग लंबे समय से की जा रही है। 

न जांच हुई और न ही हुए एक्स-रे व अल्ट्रासाउंड

डॉक्टरों की इस हड़ताल के साथ पैरामेडिकल डॉक्टर भी हड़ताल पर रहे। सोमवार को जिले की लगभग सभी 200 पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी प्रयोगशालाएं बंद रहीं। इन प्रयोगशालाओं में पुरानी रिपोर्ट तो वितरित की गई, लेकिन न नए सैंपल लिए गए और नही जांच हुई। आहूजा पैथोलॉजी एंड इमेजिंग सेंटर के मालिक डॉ. आलोक आहूजा ने बताया कि पैरामेडिकल स्टाफ भी डॉक्टरों के परिवार का ही हिस्सा होते हैं। आए दिन अस्पतालों में घटनाओं का शिकार यह स्टाफ भी होता है। लिहाजा, आईएमए के आह्वान पर सभी प्रयोगशालाएं बंद रखने का निर्णय भी लिया गया था। 

मंगलवार को खुलेंगे अस्पताल, पैथोलॉजी सेंटर
निजी चिकित्सकों और पैरामेडिकल चिकित्सकों की यह हड़ताल केवल एक दिन की थी। मंगलवार को सभी निजी अस्पताल, नर्सिंग होम खुल जाएंगे। पैथोलॉजी सेंटर पर भी सभी जांच शुरू हो जाएंगी। 

एक दिन पहले यहां निजी डॉक्टर को दिखाया था। उन्होंने अल्ट्रासाउंड के लिए बोला था, लेकिन आज जहां जा रहे हैं, वहां सब बंद पड़ा हुआ है। हम शाहजहांपुर से आए हैं। अब एक दिन और देहरादून में रुकना पड़ेगा। 
-राजेश कुमार, शाहजहांपुर 
 

मुझे तो पता ही नहीं था कि आज इस तरह की कोई हड़ताल है। पिता जी का बार बार टेस्ट कराने के लिए आना पड़ता है। आज होना था, लेकिन यहां आकर पता चला कि पैथेलॉजी बंद है। 
- राहुल, आईटी पार्क 

पहले इन लोगों को बताना चाहिए था। अभी रास्ते में ही पता चला कि आज लैब बंद हो सकती है। यहां आकर पता चला कि वाकई लैब बंद है। अब फिर से दोबारा आना पड़ेगा। पत्नी का टेस्ट बेहद जरूरी है। कल डॉक्टर को भी दिखाना है। 
- चंद्रमोहन शर्मा, सुभाषनगर 

मुझे अब फिर दोबारा टेस्ट कराने आना पड़ेगा। दूर से आने में बहुत परेशानी होती है। प्रयोगशालाओं को तो खुला ही रहने देते चाहे रिपोर्ट बाद में दे देते। 
- अली बाबा, सहस्रधारा 
विज्ञापन

सरकारी अस्पतालों की ओपीडी की ओर उमड़ी मरीजों की भीड़

पश्चिम बंगाल में डाक्टर के साथ अभद्रता के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर कुमाऊं में भी निजी डॉक्टरों ने भी सोमवार को ओपीडी ठप रखीं। अलबत्ता, आपातकालीन सेवाएं चालू रहीं। काशीपुर में ठाकुरद्वारा, मुरादाबाद, स्वार रामपुर, बाजपुर, केलाखेड़ा, रामनगर, जसपुर, अफजलगढ़, रेहड़, धामपुर से पहुंचे मरीजों को खाली हाथ लौटना पड़ा। काशीपुर के श्रीकृष्णा अस्पताल में आठ ऑपरेशन होने थे जो नहीं हो सके। अल्मोड़ा में निजी अस्पताल के डाक्टर हड़ताल पर रहे, जबकि जिला और महिला अस्पताल खुले रहे। बेस अस्पताल में दो घंटे कार्यबहिष्कार रहा।

अल्मोड़ा जिला अस्पताल में ओपीडी में 692, जबकि महिला अस्पताल में 160 मरीज ओपीडी में पहुंचे। बागेश्वर जिला अस्पताल में भी डॉक्टरों ने काला फीता बांधकर विरोध जताया और नारेबाजी की। पिथौरागढ़ और चंपावत में भी निजी अस्पताल बंद रहे। निजी डॉक्टरों की हड़ताल के चलते पिथौरागढ़ जिला अस्पताल में 850 से अधिक मरीज ओपीडी में पहुंचे, जबकि सामान्य दिनों में 450 मरीज ही ओपीडी में पहुंचते थे। यही हाल चंपावत में भी रहा। चंपावत जिले के तीन प्रमुख अस्पतालों (चंपावत, लोहाघाट और टनकपुर) में 815 मरीज ओपीडी में पहुंचे। इधर, हल्द्वानी में निजी डॉक्टरों के हड़ताल पर होने के कारण 20 हजार मरीजों को बिना परामर्श के लौटना पड़ा, जबकि पैथोलॉजी में खून एवं मल मूत्र की जांच नहीं हो पाई। डायग्नोस्टिक सेंटर में एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, एमआरआई आदि जांचें भी नहीं हो पाईं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें