स्थानीय लोगों की बुधवार को बैठक आयोजित की गई। इस दौरान सदियों से चले आ रहे अपने परंपरागत हक-हकूक को बचाने के लिए वन विभाग के खिलाफ चार अप्रैल को जन आंदोलन करने का निर्णय लिया गया है। ग्रामीणों ने बताया कि ब्रिटिश काल से हक-हकूक के तहत घर-मकान बनाने के लिए प्रतिवर्ष वन विभाग से माफी की लकड़ी मिलती है। पन्नालाल सेटलमेंट व्यवस्था के तहत जंगल से देवदार, कैल, चीड़, रई, मुरुंडा व अन्य प्रजाति के सूखे एवं जड़पट पेड़ों की छपान 31 मार्च से पहले की जाती है। वर्ष 2023 से लेकर अब तक क्षेत्र के लोगों को माफी की लकड़ी नहीं मिली है। पिछले दो साल से माफी पेड़ों की छपान नहीं होने से लोगों को घर मकान बनाने में बड़ी समस्या आ रही है। ग्रामीणों ने माफी पेड़ों की छपान नहीं होने के विरोध में चार अप्रैल को एसीएफ कार्यालय में जन आक्रोश रैली निकालने और वन विभाग परिसर में धरना प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। इस मौके पर ब्लाॅक प्रमुख एवं प्रशासक निधि राणा, प्रधान संगठन के अध्यक्ष दलीप तोमर, प्रधान संगठन के महासचिव हरीश राजगुरु, तेजपाल सिंह राणा, बलवीर सिंह चौहान, लायकराम शर्मा, धीरज सिंह राणा, विक्रम सिंह पंवार आदि माैजूद रहे। संवाद