मंगलवार को अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद हरकत में आए प्रशासन ने पटवारी को गांव जाने के निर्देश दिए, जबकि एनएच व लोनिवि के कर्मचारी भी सड़क खोलने में जुट गए। हालांकि तब तक ग्रामीण महिला को स्वयं ही कंडी में लादकर 17 किमी दूर स्यानाचट्टी तक पहुंच गए।
यहां से निजी वाहन की मदद से महिला को बड़कोट स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने महिला को देहरादून रेफर कर दिया। डा. अंगद राणा ने बताया कि महिला मानसिक रूप से कमजोर होने की वजह से विचलित है।
इसके अतिरिक्त उसके स्वास्थ्य में किसी प्रकार की गंभीर दिक्कत नहीं है। हालांकि बेहतर इलाज के लिए उसे देहरादून स्थित मनोचिकित्सक के पास रेफर किया गया है।
सरकारी तंत्र के खिलाफ रोष
बीमार महिला को लेकर अस्पताल पहुंचे प्रमोद, संजय सिंह, नरेश, नितिन सिंह आदि ने सरकारी तंत्र के खिलाफ रोष जताया। उन्होंने कहा कि पुलिस तक सूचना पहुंचाने के बावजूद महिला को निकालने के लिए एसडीआरएफ व पुलिस की टीम नहीं भेजी गई। ऐसे में उन्हें स्वयं ही बर्फीले रास्तों से महिला को कंधों पर उठाकर लाना पड़ा।
हनुमानचट्टी से फूलचट्टी तक सड़क से बर्फ हटा दी गई है, लेकिन सड़क पर पाले के कारण फिलहाल वाहनों की आवाजाही नहीं हो पा रही है। बुधवार तक यहां यातायात सुचारु कर दिया जाएगा।
-संदीप बिष्ट, साइट इंचार्ज, एनएच बड़कोट।
प्रशासन की ओर से बर्फबारी से प्रभावित गांवों की गर्भवती महिलाओं को पहले ही नजदीकी अस्पताल तक पहुंचा दिया गया है। हालांकि महिला के अचानक बीमार होने व संचार व यातायात सुविधा नहीं होने के कारण इस प्रकरण में कुछ दिक्कतें आई हैं, जिससे सबक लेते हुए सभी अधिकारियों को आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
-अनुराग आर्य, एसडीएम बड़कोट।