रैतोली के ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन को आईना दिखाते हुए अपने गांव को सड़क से जोड़ लिया है। गांव के 69 परिवारों ने 69 हजार रुपये जुटाकर श्रमदान किया और दो सप्ताह के भीतर गांव के लिए 800 मीटर सड़क बना डाली।
यह भी नजीर से कम नहीं कि 800 मीटर सड़क बनाने में जहां सरकारी तौर 50 लाख रुपये से कम खर्च नहीं आता उसे ग्रामीणों ने 69 हजार में तैयार कर लिया। पीएमजीएसवाई पोखरी के अधिशासी अभियंता आरपी सिंह भी इस बात को मानते हैं।
रैतोली गांव में 69 परिवार रहते हैं। गांव वालों को सड़क तक जाने के लिए करीब ढाई किमी पैदलव चलना पड़ रहा था। वे जिलाधिकारी से कई बार गांव तक सड़क बनाने की मांग कर चुके थे, लेकिन कहीं से कोई सुनवाई नहीं हुई। तब ग्रामीणों ने स्वयं गांव तक सड़क पहुंचाने का संकल्प लिया। ग्रामीणों ने पंचायत बुलाकर सड़क निर्माण पर आने वाले खर्च पर चर्चा की।
सड़क में आने वाली भूमि को लेकर आपसी सहमति बनाई। ग्राम पंचायत गडोरा से भी सड़क निर्माण के लिए आपसी सहमति से भूमि अधिग्रहित की गई। बाद में प्रत्येक परिवार से उनकी क्षमता के अनुसार 69 हजार की धनराशि इकट्ठा की गई। इसके बाद सात जुलाई से गडोरा-अमरपुर मोटर मार्ग पर अमरपुर बैंड से रैतोली गांव के लिए सड़क निर्माण कार्य शुरू हुआ। ग्रामीणों ने जेसीबी किराए पर लेकर हिल कटिंग करवाई, जबकि सड़क समतलीकरण कार्य स्वयं के संसाधनों से किया।
युवक मंगल दल अध्यक्ष हरेंद्र सिंह पंवार, पान सिंह, सुरेंद्र सिंह, फते सिंह, पृथ्वी फर्स्वाण, हरिकृष्ण मिश्रा, विनोद पंवार और अशोक पंवार का कहना है कि गांव का पैदल रास्ता करीब तीन किमी है। इससे आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जिला प्रशासन से ‘मेरा गांव-मेरी सड़क’ योजना से भी गांव तक सड़क निर्माण की मांग उठाई गई, लेकिन प्रशासन की ओर से सिर्फ आश्वासन ही मिले।
सरकारी तौर पर देखा जाए तो 800 मीटर सड़क के निर्माण में करीब 50 लाख रुपये खर्च हो जाते हैं। इस धनराशि में सड़क के पुश्ते और नाली निर्माण कार्य भी होता है।
-आरपी सिंह, ईई, पीएमजीएसवाई, पोखरी (चमोली)
ग्रामीणों की यह सराहनीय पहल है। अपने गांव के लिए ग्रामीणों ने यदि श्रमदान कर सड़क बनाई है तो यह अच्छी पहल है।
- आशीष जोशी, डीएम, चमोली