क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सिरोला गांव में हाल ही में एक बकरी की मौत हो गई थी। इसके बाद कुछ ग्रामीणों ने उस मृत पशु का मांस पकाया और उसे खा लिया। मांस का सेवन करने के कुछ ही घंटों बाद लोगों को फूड पॉइजनिंग की शिकायत होने लगी। उन्हें तेज उल्टी-दस्त, पेट दर्द और घबराहट शुरू हो गई। खासकर छोटे बच्चों में डायरिया के गंभीर लक्षण उभर आए। स्थिति बिगड़ती देख परिजन आनन-फानन में मरीजों को लेकर आसपास के अलग-अलग अस्पतालों की ओर दौड़े। बच्चों की नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें श्रीनगर स्थित बेस अस्पताल के बाल रोग विभाग में भर्ती किया गया है, जहां उनका सघन इलाज जारी है।
चिकित्सकों ने दी सख्त चेतावनी
इस घटना पर चिंता जताते हुए चिकित्सक डॉ. अजय गोस्वामी ने लोगों को कड़े शब्दों में सतर्क किया है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि किसी पशु की बीमारी या संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने पर उसके मांस का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए। मरे हुए पशु के मांस में खतरनाक बैक्टीरिया और संक्रमणकारी तत्व तेजी से पनपते हैं, जो तेज आंच पर पकाने के बाद भी खत्म नहीं होते और स्वास्थ्य के लिए जानलेवा जोखिम पैदा करते हैं।
डिहाइड्रेशन तेजी से ले सकता है गंभीर रूप
डॉक्टर ने विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर स्वास्थ्य वाले लोगों को ऐसे दूषित मांस से पूरी तरह परहेज करने की हिदायत दी है। उन्होंने सलाह दी है कि यदि मांस खाने के बाद उल्टी, दस्त, तेज पेट दर्द, बुखार या डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) जैसे लक्षण दिखाई दें, तो घरेलू नुस्खों में समय बिल्कुल बर्बाद न करें। ऐसे मामलों में तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना और मरीज को अस्पताल पहुंचाना बेहद जरूरी है, क्योंकि समय पर इलाज न मिलने से डिहाइड्रेशन तेजी से गंभीर रूप ले सकता है।