उन्होंने कहा जब भी देवता सोमेश्वर महादेव सोमेषू की समिति का गठन किया जाएगा तो वह संपत्ति का विक्रय पत्र समिति के नाम पंजीकृत करा देंगे। प्रोफेसर भास्कर के इस निर्णय को क्षेत्र में त्याग, सामाजिक जिम्मेदारी और धार्मिक आस्था के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। उनका यह कदम आने वाली पीढ़ियों को भी समाजहित में योगदान देने की प्रेरणा देगा।