सीएम हरीश रावत और विजय बहुगुणा
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विधानसभा सत्र के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के लेटर बम फटने का दौर जारी है। पिछले दिनों वर्ग-4 की भूमि पर पट्टेदारों का मालिकाना हक दिए जाने का पत्र लिखा और बुधवार को ऊधमसिंह नगर में शिक्षा आचार्यों/अनुदेशकों को शिक्षा मित्र के रूप में समायोजित नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया।
उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि यह कार्य सभी जिलों में हो चुका है, लेकिन ऊधमसिंह नगर में ही क्यों लटकाया गया है, यह समझ से परे हैं।
मुख्यमंत्री हरीश रावत को भेजी चिट्ठी में पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि 19 नवंबर 2010 को शासनादेश जारी हो चुका है। पूरे प्रदेश के कुल 1400 शिक्षा आचार्यों/अनुदेशकों में से 1070 को शिक्षा मित्र के पद पर समायोजित कर डीएलएड का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
एक साल बीतने के बावजूद नहीं किया समायोजन:
प्रारंभिक शिक्षा निदेशक ने 15 अप्रैल 2015 को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद को पत्र भेजकर अवगत कराया था कि ऊधमसिंह नगर जनपद में 310 शिक्षा आचार्यों/अनुदेशकों को शिक्षा मित्र के रूप में समायोजित करने की कार्यवाही गतिमान है, लेकिन करीब एक साल बीतने के बावजूद इनका समायोजन नहीं किया गया।
नवंबर 2013 में उच्च न्यायालय नैनीताल में इन अनुदेशकों के पक्ष में निर्णय दे चुका है। इसके बाद सरकार ने विशेष याचिका दायर की, जिसका कोई मतलब नहीं है। इसलिए सरकार अपना मुकदमा वापस लेकर इन 310 अनुदेशकों का शिक्षा मित्र के पद पर समायोजन करे।