राज्य सूचना आयोग ने एक बार फिर शासन को आईना दिखाने का काम किया है। विजिलेंस को आरटीआई के दायरे से बाहर करने की अधिसूचना को सूचना आयुक्त सुरेंद्र सिंह रावत ने सुनवाई के बाद रद्द कर दिया। तय तारीख पर पैरवी के लिए भी कोई नहीं पहुंचा, इसके लिए एक पत्र मुख्य सचिव को भेजकर स्थिति भी समझाई है।
करीब छह माह पहले शासन ने एक अधिसूचना जारी कर विजिलेंस विभाग को आरटीआई के दायरे से बाहर कर दिया था। शासन का तर्क था कि लोग आरटीआई के तहत सारी जानकारी लेकर सार्वजनिक कर रहे हैं, इससे भ्रष्टाचार निवारण की कार्यवाही सिरे नहीं चढ़ रही है।
यह मामला तब खुला जब प्रमोद डोभाल नाम के व्यक्ति ने सूचना मांगी और उसे मना कर दिया गया। इसके बाद यह व्यक्ति सूचना आयोग की शरण में पहुंचा। मामले की सुनवाई सुरेंद्र सिंह रावत की कोर्ट में लगी तो शासन के पैरोकार पहली ही तारीख पर हांफ गए।