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CIC ने दिखाया शासन को आईना, कहा RTI से बाहर नहीं विजिलेंस

Sat, 16 Jan 2016 11:30 AM IST
अजित सिंह राठी/अमर उजाला, देहरादून
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राज्य सूचना आयोग ने एक बार फिर शासन को आईना दिखाने का काम किया है। विजिलेंस को आरटीआई के दायरे से बाहर करने की अधिसूचना को सूचना आयुक्त सुरेंद्र सिंह रावत ने सुनवाई के बाद रद्द कर दिया। तय तारीख पर पैरवी के लिए भी कोई नहीं पहुंचा, इसके लिए एक पत्र मुख्य सचिव को भेजकर स्थिति भी समझाई है।
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करीब छह माह पहले शासन ने एक अधिसूचना जारी कर विजिलेंस विभाग को आरटीआई के दायरे से बाहर कर दिया था। शासन का तर्क था कि लोग आरटीआई के तहत सारी जानकारी लेकर सार्वजनिक कर रहे हैं, इससे भ्रष्टाचार निवारण की कार्यवाही सिरे नहीं चढ़ रही है।

यह मामला तब खुला जब प्रमोद डोभाल नाम के व्यक्ति ने सूचना मांगी और उसे मना कर दिया गया। इसके बाद यह व्यक्ति सूचना आयोग की शरण में पहुंचा। मामले की सुनवाई सुरेंद्र सिंह रावत की कोर्ट में लगी तो शासन के पैरोकार पहली ही तारीख पर हांफ गए।
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नहीं मानी आरटीआई से बाहर करने की बात

मांगने पर आयोग ने एक महीने का समय भी दे दिया, लेकिन अगली तारीख पर पैरवी के लिए शासन की तरफ से कोई नहीं पहुंचा तो आयोग ने विजिलेंस को आरटीआई के दायरे से बाहर करने की अधिसूचना को विधि शून्य घोषित कर दिया। साथ ही एक पत्र मुख्य सचिव को भेजा। पत्र में कहा कि एक जारी हो चुकी अधिसूचना को बरकरार रखने की पैरवी के लिए तारीख पर शासन के नुमाइंदे भी नहीं पहुंचते। यदि आरटीआई को लेकर इतनी उदासीनता है तो यह चिंताजनक है।

फैसले में क्या कहा आयोग ने
सूचना आयुक्त सुरेंद्र सिंह रावत ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम में सुरक्षा और अभिसूचना से जुड़े विभागों को ही केंद्र या राज्य सरकार एक गजट नोटिफिकेशन के माध्यम से आरटीआई के दायरे से बाहर कर सकती है, लेकिन विजिलेंस इस श्रेणी में नहीं है। इसलिए इसे छूट नहीं दी जा सकती। राज्य सरकार ने अपने क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर निर्णय लिया, अत: यह अधिसूचना मान्य नहीं है। वैसे भी यह अधिसूचना विरोधाभासी है।
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