यह हैं आरोप
योग अनुदेशकों के पदों पर जारी रोस्टर को बदलने, माइक्रोबायोलॉजिस्ट के पदों पर भर्ती में नियमों का अनुपालन न करने, बायोमेडिकल संकाय व संस्कृत में असिस्टेंट प्रोफेसर एवं पंचकर्म सहायक के पदों पर विज्ञप्ति प्रकाशित करने और फिर रद्द करने, विवि में पद न होते हुए भी संस्कृत शिक्षकों को प्रमोशन एवं एसीपी का भुगतान करने, बिना शासन की अनुमति बार-बार विवि की ओर से विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन निकालने और रोक लगाने, विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए विवि की ओर से गठित समितियों के गठन की विस्तृत सूचना शासन को न देने के साथ ही पीआरडी के माध्यम से 60 से अधिक युवाओं को भर्ती करने का आरोप है।
कई अधिकारी आ सकते हैं शिकंजे में
विजिलेंस जांच के शिकंजे में 2017 से लेकर 2022 के बीच कार्यरत रहे कई बड़े अधिकारी भी आ सकते हैं। हालांकि विजिलेंस जांच शुरू होने के बाद ही इस राज से पर्दा उठ सकेगा।
पांच साल विभाग के मंत्री थे हरक
जांच समिति को दस्तावेज नहीं दे रहा विवि प्रशासन
शासन ने अप्रैल माह में एसएस वल्दिया की अध्यक्षता में जो जांच समिति गठित की थी, उसे विवि प्रशासन दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, जांच समिति की ओर से कई बार रिमाइंडर भी भेजा जा चुका है। जल्द ही यह जांच समिति भी विवि में जांच के लिए जा सकती है।