अधिकारियों के मुताबिक छह साल पहले यह परीक्षा हुई थी। ऐसे में कई साक्ष्य तो नष्ट भी हो गए। इनमें कॉल डिटेल को सबसे बड़ा साक्ष्य माना जाता है। लेकिन, इतनी पुरानी कॉल डिटेल भी अब नहीं निकल पाएंगी। इसके अलावा तमाम इस तरह के साक्ष्य हैं जो आयोग ने मांगने पर भी उपलब्ध नहीं कराए हैं। यही नहीं उस वक्त के कई अधिकारी और कर्मचारी सेवानिवृत्त भी हो गए हैं। ओएमआर शीट का मिलान भी करना है, लेकिन इस काम में भी विजिलेंस को सहयोग नहीं किया जा रहा है।
ये भी पढ़ें..हठ लाई मौत!: टूटती रहीं बेटी की सांसें और पत्थर दिल बनी रही मां, सवाल- जिद के आगे क्यों झुका अस्पताल?
ओएमआर शीट में हुई थी छेड़छाड़, किसने की नहीं पता
परीक्षा की ओएमआर शीटों में छेड़छाड़ की गई थी। इसकी पुष्टि फोरेंसिक जांच में भी हो गई है। लेकिन, यह किसने की अभी तक इस बात की जानकारी विजिलेंस को नहीं मिल पाई है। ऐसे में अब तक इस मुकदमे में किसी को भी नामजद नहीं किया गया है। इतनी बड़ी धांधली में मुकदमा ढाई सालों से अज्ञात में ही चला आ रहा है। जांच पूरी होगी तो कौन-कौन इसमें नामजद होते हैं यह तो आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन, अगर वास्तव में जांच में सहयोग नहीं किया जा रहा है तो मामले में कोई बड़ा हाथ होने की आशंका है।