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I कैडेट्स से एक-एक पौधा लगाने की अपील की और खुद मां के नाम एक पौधा रोपाI
अपने दो दिवसीय दौरे के दूसरे दिन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ देहरादून स्थित राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज पहुंचे। उपराष्ट्रपति ने कॉलेज के कैडेट्स से संस्थान के आदर्श वाक्य-बल विवेक को चरितार्थ करने के साथ ही ताकत और ज्ञान विकसित करने को कहा। उन्होंने कहा कि ताकत के साथ विवेक का प्रयोग करने से हर चुनौती का सामना किया जा सकता है। उन्होंने कहा, आपके बीच आकर मेरी छह दशक पुरानी याद ताजा हो गई। जब मैं भी सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ में छात्र था। उपराष्ट्रपति ने कहा, मैं पैदा तो झुंझुनू के एक गांव में हुआ था, लेकिन मेरा असली जन्म सैनिक स्कूल में ही हुआ। आप भी यहां बहुत कुछ ऐसा हासिल करेंगे, जो पूरी जिंदगी काम आएगा।
सुबह करीब साढ़े 10 बजे राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) का काफिला काॅलेज में पहुंच गया था। यहां कमांडेंट कर्नल राहुल अग्रवाल ने उनका स्वागत किया। सबसे पहले उपराष्ट्रपति ने अपनी माता केसरी देवी के नाम पौधा रौपा। उसके बाद राज्यपाल ने अपनी मां कंस कौर के नाम पौधा लगाया। उसके बाद उपराष्ट्रपति हॉल में पहुंचे और वहां कैडेट्स को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कैसी भी परिस्थिति हो, राष्ट्र हित को सबसे ऊपर रखना चाहिए। देश की सेवा गर्व और निर्भीकता के साथ करनी चाहिए। उन्होंने कैडेट्स को कहा कि भारत माता आपका इंतजार कर रही है और राष्ट्र का भविष्य आपके कंधों पर है। उन्होंने कॉलेज के पूर्व छात्रों और संस्थान से जुड़े लोगों से अपील की कि उन्हें एक थिंक टैंक के रूप में काम करना चाहिए। इसके अलावा युवाओं में राष्ट्रीयता की भावना का संचार करें। उन्होंने कहा कि कुछ लोग भारत की आर्थिक वृद्धि, विकास यात्रा और वैश्विक मंच पर उन्नति को नहीं मानते, वह जमीनी हकीकत से अंजान हैं, ऐसे लोगों खिलाफ कदम उठाने चाहिए।
Iविफलता से डरें नहीं... ये सफलता की ओर कदमI
उपराष्ट्रपति ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के 10 दिसंबर 1962 के भाषण को याद करते हुए कहा कि पृथ्वी बहादुरों की होती है। उन्होंने कैडेट्स को कठिनाइयों के समय में भी मजबूती से खड़े रहने के लिए प्रेरित किया। कहा कि जीवन में कई बार बुरा समय भी आएगा, ऐसे समय में ही आपकी बुद्धिमता को परखा जाएगा। जो लोग चुनौती का डटकर सामना करते हैं और विषम परिस्थितियों में जोखिम उठाने से नहीं डरते वही आगे चलकर नेतृत्व करते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में कभी विफलता से नहीं डरना चाहिए। इस विफलता को सफलता की ओर एक कदम मानना चाहिए और इससे डरना नहीं चाहिए, क्योंकि डर की भावना प्रतिभा को रोकती है। उन्होंने चंद्रयान मिशन की सफलता की कहानी का जिक्र किया। कहा कि चंद्रयान 2 आंशिक रूप से सफल हुआ, लेकिन पूरी तरह से नहीं। कुछ लोगों के लिए यह विफलता थी और समझदार लोगों के लिए यह सफलता की ओर एक कदम। पिछले साल 23 अगस्त को चंद्रयान 3 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अपना कदम रखा और भारत इस उपलब्धि को प्राप्त करने वाला पहला देश बन गया। राष्ट्रीय भारतीय सैन्य कॉलेज के कमांडेंट कर्नल राहुल अग्रवाल, कैडेट्स और शिक्षक आदि मौजूद रहे।
Iबेटियां किसी से कम नहींI
उपराष्ट्रपति ने आरआईएमसी और सैनिक स्कूलों में लड़कियों की भर्ती की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस कदम से लिंग समानता को मजबूत करता है। आज हमारी हमारे देश की बेटियां लड़ाकू विमानों की पायलट हैं। विभिन्न अंतरिक्ष मिशनों की कमान संभाल रही हैं। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण के बारे में उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से यह कदम गेम चेंजर के रूप में होगा।