2010 में जिलाधिकारी ने मांस की सभी दुकानों को नगर निगम क्षेत्र से बाहर करने का प्रस्ताव पास किया था और वर्ष 2017 में नगर निगम बोर्ड ने भी प्रस्ताव पर मुहर लगा दी थी। अभी तक मांस की दुकानें जस की तस है।
बताया कि मुस्लिम आबादी भी इन दुकानों से परेशान है और गंदगी व बीमारियां फैल रही है। वर्ष 2016 में सूचना अधिकार अधिनियम से मिली जानकारी का हवाला देते हुए विहिप नेता ने बताया कि नगर निगम ने 12 ही दुकानों को लाइसेंस दिए हुए है। जबकि दुकानों की संख्या सौ से भी ऊपर है। चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के अंदर अवैध दुकानें बंद न हुई तो वह रेल चौकी के ठीक सामने राम चौक पर आत्मदाह करने पर मजबूर होंगे।