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उत्तराखंड से छात्रवृत्ति के कम आवेदन देख केंद्र हैरान 

Fri, 29 Sep 2017 01:27 PM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
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केंद्र सरकार अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों को पढ़ाने और प्रोत्साहित करने के लिए झोली खोले हुए है लेकिन प्रदेश में हालत ऐसे है कि छात्रवृत्ति लेने वालों को ढूंढना पड़ रहा है।
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छात्रवृत्ति आवेदन के मामले में उत्तराखंड के बहुत पीछे होने पर केंद्र ने हैरत जताई है। केंद्र ने आवेदनों की संख्या बढ़ाने के लिए अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजनाओं का प्रचार-प्रसार की नसीहत दी है। प्रदेश में अभी तक एक हजार आवेदन ही चयनित हो पाए हैं जबकि 10,984 फार्म छोटी-मोटी कमियों को कारण रोक दिए गए हैं।

केंद्र सरकार मुसलिम, सिख, जैन, ईसाई, बौद्ध और पारसी समुदाय के बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करने के लिए प्री-मैट्रिक, पोस्ट मैट्रिक और मेरिट कम मींस छात्रवृत्ति योजना चला रही है। उत्तराखंड से अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों को छात्रवृत्ति के लिए 23, 412 आवेदन का लक्ष्य रखा है लेकिन 1 हजार आवेदनों के चयनित होने पर केंद्र ने हैरत जताई है। अब केंद्रीय संयुक्त सचिव निवा सिंह ने  शासन को पत्र भेजकर नसीहत दी है कि अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना का प्रचार-प्रसार करें।
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आवेदनों की संख्या सम्मानजनक हो सके, इसके लिए 15 दिन का समय बढ़ाते हुए आवेदन की अंतिम तिथि 30 सितंबर कर दी है। केंद्र की सख्ती के बाद अब अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने शिविर लगवाने शुरू किए हैं। शिविरों की तरफ लोगों का ध्यान खींचने के लिए आधार कार्ड भी बनवाए जा रहे हैं। उप निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण रईस अहमद ने बताया कि अधिक से अधिक आवेदन भरवाने के लिए जिलों में कैंप लगवाए जा रहे हैं। इसके लिए छात्रों को प्रोत्साहित भी किया जा रहा है।

यह है सारी गड़बड़ी
मामले को खंगालने पर पता चला कि अगर अल्पसंख्यक समुदायों में जागरूकता की कमी तो है ही इसके लिए स्कूल और जिलों के अधिकारी भी जिम्मेदार हैं। अधिकारी इसमें दिलचस्पी ही नहीं ले रहे हैं। इस साल 10,984 आवेदन अटके हैं। इनमें 9008 आवेदन स्कूलों और 1976 विभागीय कार्यालयों में फंसे हैं। छात्र को ऑनलाइन आवेदन करना पड़ता है, फिर स्कूल सत्यापित करके जिला अल्पसंख्यक कार्यालय भेजते हैं, इसके बाद इसे राज्य स्तर से केंद्र को भेजा जाता है।
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छात्रवृत्ति
- प्री मैट्रिक (कक्षा एक से 10) अधिकतम 5000 रुपये सालाना।
- पोस्ट मैट्रिक (कक्षा 11 से ऊपर)अधिकतम 10000 रुपये सालाना।
- मेरिट कम मींस (तकनीकी एवं व्यावसायिक कोर्स) अधिकतम 30 हजार रुपये सालाना तथा सरकारी आईआईटी और आईआईएम में पढ़ने वाले छात्रों को कोर्स की पूरी फीस।

राज्य में अल्पसंख्यक समुदायों के आंकड़े (वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार)
मुसलिम कुल आबादी का 13.95 प्रतिशत, सिख 2.34 प्रतिशत, ईसाई 0.37 प्रतिशत, बौद्ध 0.15 प्रतिशत, जैन 0.09 प्रतिशत, पारसी तथा अन्य 0.12 प्रतिशत।
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