दीप प्रज्ज्वलित करते मुख्य अतिथि, राज्यपाल व सीएम
जिस तरह देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बदलाव की बयार चला रहे हैं, उसी तरह देश के युवाओं को भी रिफॉर्म (सुधार), परफॉर्म (प्रदर्शन) और ट्रांसफॉर्म(परिवर्तन) के तहत विकास में भागीदार होने की जरूरत है।
यह बात इक्फाई विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में शनिवार को बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कही। उन्होंने कहा कि निश्चित तौर पर पूर्व के प्रधानमंत्रियों इंदिरा गांधी, नरसिम्हा राव, मनमोहन सिंह ने देश में बदलाव की बयार चलाई, लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी इस बदलाव को आगे बढ़कर चला रहे हैं। उन्होंने जीएसटी को देश के विकास का अहम पहलू बताया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि नेचर और कल्चर को बचाकर रखेंगे तो हमारे विकास की दर बढ़ती जाएगी।
ग्लोबल वार्मिंग, माइग्रेशन, पेयजल जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए हमें शोध को बढ़ावा देना होगा। हम अब टीसुनामी के नुकसान से बचने को अर्ली वार्निंग सिस्टम डेवलप कर चुके हैं तो शोध से ही दूसरी समस्याओं को भी दूर किया जा सकेगा। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार के लिए नहीं बल्कि सशक्त भारत के लिए जरूरी है। उन्होंने महिलाओं और नदियों की तुलना करते हुए कहा कि देश की सभी नदियों के नाम महिलाओं के नाम पर हैं। जिस तरह हमें महिलाओं का सम्मान करना चाहिए, उसी तरह हमें नदियों को भी संरक्षित करना चाहिए।
सबका साथ और सबका विकास ही सच्ची राष्ट्रीयता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जितनी भी योजनाएं चला रही है, उनमें पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। यह तभी होगा, जब सब अपनी जिम्मेदारी कर निर्वहन करेंगे। पूरी दुनिया तेजी से बदल रही है, प्रतियोगिता बढ़ रही है तो ऐसे हालात में युवाओं को इस दौर में खुद को साबित करने की चुनौती है। इस मौके पर उन्होंने दीक्षांत समारोह में आठ छात्रों को गोल्ड मेडल से सम्मानित किया।