तहसील प्रशासन के आदेशों के बाद भी देर रात को पहाड़ों पर वाहनों के संचालन पर रोक नहीं लग पा रही है। इसका खामियाजा हादसे में पांचों युवकों को अपनी जान से हाथ धोकर चुकाना पड़ा।
मानसून के समय पहाड़ों पर देर रात को सफर करना बेहद खतरनाक हो जाता है। पहाड़ों से गिरते पत्थर और डेंजर जोन कभी भी लोगों की जान पर भारी पड़ सकते हैं। इसी को देखते हुए बीती एक जुलाई को तहसील प्रशासन ने रात के समय जौनसार बावर की सड़कों पर वाहन न चलाने की एडवाइजरी जारी की थी। बावजूद इसके सूरज ढलने के बाद देर रात तक वाहन सड़कों पर दौड़ते रहते हैं। कालसी-चकराता मोटर मार्ग पर लोगों को दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की जानकारी देने के लिए कोई साइन बोर्ड भी नहीं लगाया गया है। इसका खामियाजा लोगों को दुर्घटना के रूप में भुगतना पड़ रहा है।
व्यापार मंडल के सचिव मदन रावत, डॉ. भूपाल सिंह तोमर, दिनेश तोमर आदि का कहना है इन दिनों पर्यटन सीजन के चलते बड़ी संख्या में सैलानी दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ से चकराता घूमने के लिए आते हैं। इन पर्यटकों को क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति की ज्यादा जानकारी नहीं होती। इस कारण पर्यटक रात को भी सड़कों पर सफर करते हैं। कई बार चालक मादक पदार्थों का सेवन कर भी वाहन चलाते हैं। कहा कि तहसील और पुलिस प्रशासन को रात को अभियान चला ऐसे वाहनों को पहाड़ पर चढ़ने और उतरने से रोकना चाहिए।
एसडीएम डॉ. अपूर्वा सिंह ने बताया कि रात को पहाड़ों पर वाहनों के संचालन पर रोक लगाने के लिए पुलिस को निर्देशित किया जाएगा। लोनिवि के अधिकारियों को भी दुर्घटना संभावित क्षेत्रों पर बोर्ड लगाने के निर्देश दिए जाएंगे।