उप जिला अस्पताल, विकासनगर पछवादून का सबसे बड़ा अस्पताल है। अस्पताल में पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। अस्पताल के मुख्य द्वार से लेकर पीएसए ऑक्सीजन प्लॉट तक मरीजों और तीमारदारों के वाहन बेतरतीब ढंग से खड़े होते है। ऐसे में अस्पताल में आने और जाने वाले वाली एंबुलेंस परिसर में ही फंस जाती है।
उप जिला अस्पताल में रोजाना करीब 500 से 550 मरीज उपचार के लिए आते हैं। करीब 30-40 मरीज इमरजेंसी में उपचार के लिए आते हैं। इनमें से कई गंभीर बीमार और दुर्घटना में घायल लोगों को इमरजेंसी एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल लाया जाता है।
वहीं, कई गंभीर मरीजों को अस्पताल से हायर सेंटर भी रेफर किया जाता है। उप जिला अस्पताल में पार्किंग नहीं है। सुबह से से अस्पताल मुख्य द्वारट से परिसर के दोनों ओर दोपहिया वाहनों की कतार लगनी शुरू हो जाती है। यह कतार धीरे-धीरे अस्पताल परिसर में बने पीएसए प्लांट के बाहर तक पहुंच जाती है।
जब, मरीजों और तीमारदारों की भीड़ अधिक रहती है तो अस्पताल परिसर में बने दोनों प्रतीक्षालयों के बाहर भी दोपहिया वहन खड़े हो जाते हैं। वहीं, चौपहिया वाहन आवासीय परिसर की ओर बेहद सीमित जगह खड़े होते हैं।
जब गंभीर मरीजों और घायलों को लेकर एंबुलेंस अस्पताल आती है जाती है तो उसके निकलने के लिए जगह ही नहीं बचती है। एंबुलेंस के कई बार हार्न बजाने या वाहन हटाने के लिए कहने पर वाहन मालिक को ढूंढा जाता है। उसके बाद वाहन हटाया जाता है। ऐसी ही परेशानी खुशियों की सवारी से घर जा रही प्रसूताओं को भी झेलनी पड़ती है।
विधायक भी हो चुके है अव्यवस्था के शिकार, लगाई थी फटकार
- बीते साल दिसंबर में हनुमतधाम के पास एक तेज गति से आ रही कार ने बाइक को टक्कर मार दी। एक अन्य बाइक भी कार से बचने के चक्कर में रपट गई थी। दुर्घटना में तीन लोग घायल हुए थे। विधायक, विकासनगर मुन्ना सिंह चौहान एक गंभीर रूप से घायल युवक को अपनी कार से उप जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। इस दौरान परिसर में बेतरतीब ढंग से खड़े वाहनों को लेकर विधायक ने अस्पताल प्रशासन की जमकर क्लास लगाई थी। बीते अक्तूबर में सीएमओ डॉ. एसके जैन में भी निरीक्षण के दौरान अस्पताल में बेतरतीब ढंग से खड़े वाहनों को लेकर नाराजगी जताई थी। उन्होंने अस्पताल प्रशासन को व्यवस्था में सुधार के निर्देश दिए थे। लेकिन, अव्यवस्था जस की तस बनी हुई है।
कोट,,,,,,,,,
अस्पताल परिसर में पार्किंग नहीं है। परिसर में जगह का भी अभाव है। कई बार कर्मचारियों माध्यम से व्यवस्था बनाने का प्रयास किया गया। लेकिन, कई वाहन चालक उल्टा कर्मचारियों से बहस करने और लड़ने लगते हैं। इससे और अधिक अव्यवस्था होती है। व्यवस्था बनाने के लिए पुलिस को पत्र लिखा जा रहा है। -डॉ. विजय सिंह, सीएमएस