वसंत पंचमी के साथ ही माघ महोत्सव का आगाज भी हो गया है। टीएचडीसी मैदान में शुक्रवार को उत्तराखंड सांस्कृतिक माघ महोत्सव की शुरूआत महासू वंदना के साथ हो गई।
चकराता के ढोल वादकों की धुन ने जहां रोमांचित किया, वहीं संगीता ढौंढियाल और रेशमा शाह ने लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। तीन दिन तक चलने वाले महोत्सव में प्रदेश में रह रही पांचों जनजातियों सहित दुर्लभ पहाड़ी व्यंजनों और हिमालयी क्षेत्र के कई उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई है।
इस दौरान कई ठेठ जनजाति नृत्य झींझी, स्वांग सहित जौनसारी, रवांल्टी आदि प्रस्तुतियों की झलक भी देखने को मिली।
जौनसार बावर क्षेत्र विकास समिति की ओर से उत्तराखंड सांस्कृतिक माघ महोत्सव-2016 का शुक्रवार को वसंत पंचमी के मौके पर महासू देवता की वंदना से शुरूआत की गई।
दून में रहने वाले प्रदेशभर के विभिन्न समुदाय के लोग रेशमा शाह, बेबी प्रियंका और नरेश शाह पर खूब झूमे। सुदूर रवांई के पारंपरिक व्यंजन पहाड़ी रसोई की ओर से पेश किए गए। दुर्लभ हिमालयी उत्पादों के स्टाल भी लगाए गए हैं। महोत्सव की शुरूआत मुख्यमंत्री के औद्योगिक सलाहकार रणजीत सिंह रावत ने किया।
इस मौके पर महोत्सव के आयोजक जौनसार बावर क्षेत्र विकास समिति के अध्यक्ष गीताराम गौड़, सुशील गौड़, राजेंद्र डोभाल, जगमोहन शर्मा आदि मौजूद रहे।
माघ महोत्सव में परोसा प्यार और पहाड़ी उत्पाद
पहाड़ी व्यंजनों, उत्पादों और दुर्लभ हिमालयी जड़ी-बूटियों के शौकीन हैं तो माघ महोत्सव में चले आइए। शुक्रवार से दून यूनिवर्सिटी मार्ग स्थित टिहरी नगर मैदान में शुरू हुए महोत्सव में दुर्लभ परंपरागत पहाड़ी व्यंजनों का स्वाद और उत्पाद आपको मिलेगा।
महोत्सव में पहाड़ी रसोई तीन दिन तक आने वाले लोगों को पहाड़ के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चखाएगी। पहले दिन पहुंचे कई लोगों ने पहाड़ी व्यंजनों का आनंद लिया। पहाड़ी रसोई के मीनू में मोमो की तरह स्टीम से बनने वाला सीड़ा, अश्का, तिल कुचांई, तिल की चटनी, काली दाल के पकौड़े, कुलथ की दाल भरी रोटी, कोदे की रोटी, झंगोरे की खीर, लाल चावल, राजमा की दाल है। पारंपरिक धान कूटने की ओखली, मट्ठा बनाने की छोल्नी-परेड़ा, बकरी की खाल का बिछौना सहित कई ऐसे पारंपरिक उत्पाद जो लुप्तप्राय हैं को भी प्रदर्शनी के लिए रखा गया है।
नीती माणा घाटी से आए हीरामणी ने शुद्ध हिमालयी उत्पाद रखे हैं जिनके बारे में नई पीढ़ी अनजान है। पहाड़ी रसोई की स्वादिस्ट थाली बनाने वालाें में निधि उनियाल डंगवाल चंडीगढ़, उत्तरकाशी नौगांव के कोटियालगांव की अशरफी देवी, शशि देवी, असिता डोभाल, नौगांव बाजार की जमुना देवी, कला नौटियाल, मांडण गांव की सरोज थपलियाल, दून की उमा डंगवाल, उमा बहुगुणा, पुष्पा डंगवाल, गीतांजलि शामिल हैं।
नीती माणा घाटी से वचन सिंह नेगी ने डोलु, कड़वी, भोजपत्र, 5 किस्म की राजमा, जख्या, रामदाना, तुलसी चायपति, करण, कूटा, ग्रीन टी, चोरा आदि दुर्लभ हिमालयी उत्पादों का स्टाल लगाए हैं।