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वसंत के अनोखे रंगों में रंगी देवभूमि

Sun, 14 Feb 2016 05:27 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
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वसंत पंचमी के साथ ही माघ महोत्सव का आगाज भी हो गया है। टीएचडीसी मैदान में शुक्रवार को उत्तराखंड सांस्कृतिक माघ महोत्सव की शुरूआत महासू वंदना के साथ हो गई।
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चकराता के ढोल वादकों की धुन ने जहां रोमांचित किया, वहीं संगीता ढौंढियाल और रेशमा शाह ने लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। तीन दिन तक चलने वाले महोत्सव में प्रदेश में रह रही पांचों जनजातियों सहित दुर्लभ पहाड़ी व्यंजनों और हिमालयी क्षेत्र के कई उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई है।

इस दौरान कई ठेठ जनजाति नृत्य झींझी, स्वांग सहित जौनसारी, रवांल्टी आदि प्रस्तुतियों की झलक भी देखने को मिली।
जौनसार बावर क्षेत्र विकास समिति की ओर से उत्तराखंड सांस्कृतिक माघ महोत्सव-2016 का शुक्रवार को वसंत पंचमी के मौके पर महासू देवता की वंदना से शुरूआत की गई।
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दून में रहने वाले प्रदेशभर के विभिन्न समुदाय के लोग रेशमा शाह, बेबी प्रियंका और नरेश शाह पर खूब झूमे। सुदूर रवांई के पारंपरिक व्यंजन पहाड़ी रसोई की ओर से पेश किए गए। दुर्लभ हिमालयी उत्पादों के स्टाल भी लगाए गए हैं। महोत्सव की शुरूआत मुख्यमंत्री के औद्योगिक सलाहकार रणजीत सिंह रावत ने किया।

इस मौके पर महोत्सव के आयोजक जौनसार बावर क्षेत्र विकास समिति के अध्यक्ष गीताराम गौड़, सुशील गौड़, राजेंद्र डोभाल, जगमोहन शर्मा आदि मौजूद रहे।

माघ महोत्सव में परोसा प्यार और पहाड़ी उत्पाद
पहाड़ी व्यंजनों, उत्पादों और दुर्लभ हिमालयी जड़ी-बूटियों के शौकीन हैं तो माघ महोत्सव में चले आइए। शुक्रवार से दून यूनिवर्सिटी मार्ग स्थित टिहरी नगर मैदान में शुरू हुए महोत्सव में दुर्लभ परंपरागत पहाड़ी व्यंजनों का स्वाद और उत्पाद आपको मिलेगा।

महोत्सव में पहाड़ी रसोई तीन दिन तक आने वाले लोगों को पहाड़ के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चखाएगी। पहले दिन पहुंचे कई लोगों ने पहाड़ी व्यंजनों का आनंद लिया। पहाड़ी रसोई के मीनू में मोमो की तरह स्टीम से बनने वाला सीड़ा, अश्का, तिल कुचांई, तिल की चटनी, काली दाल के पकौड़े, कुलथ की दाल भरी रोटी, कोदे की रोटी, झंगोरे की खीर, लाल चावल, राजमा की दाल है। पारंपरिक धान कूटने की ओखली, मट्ठा बनाने की छोल्नी-परेड़ा, बकरी की खाल का बिछौना सहित कई ऐसे पारंपरिक उत्पाद जो लुप्तप्राय हैं को भी प्रदर्शनी के लिए रखा गया है।

नीती माणा घाटी से आए हीरामणी ने शुद्ध हिमालयी उत्पाद रखे हैं जिनके बारे में नई पीढ़ी अनजान है। पहाड़ी रसोई की स्वादिस्ट थाली बनाने वालाें में निधि उनियाल डंगवाल चंडीगढ़, उत्तरकाशी नौगांव के कोटियालगांव की अशरफी देवी, शशि देवी, असिता डोभाल, नौगांव बाजार की जमुना देवी, कला नौटियाल, मांडण गांव की सरोज थपलियाल, दून की उमा डंगवाल, उमा बहुगुणा, पुष्पा डंगवाल, गीतांजलि शामिल हैं।

नीती माणा घाटी से वचन सिंह नेगी ने डोलु, कड़वी, भोजपत्र, 5 किस्म की राजमा, जख्या, रामदाना, तुलसी चायपति, करण, कूटा, ग्रीन टी, चोरा आदि दुर्लभ हिमालयी उत्पादों का स्टाल लगाए हैं।

बच्चों का कराया गया विद्यारंभ संस्कार

वसंत पंचमी के मौके पर लोगों ने शनि मंदिर में अपने बच्चों का विद्यारंभ संस्कार कराया। 21 बच्चों का विद्यारंभ संस्कार कराया गया। गढ़ी कैंट स्थित नवग्रह शनि मंदिर के डॉ. आचार्य सुशांत राज ने वसंत पंचमी के मौके पर मंदिर में विशेष पूजन, हवन आदि कार्यक्रम संपन्न कराए।

शहर भर में विभिन्न स्थानों पर पूजन-हवन आदि कार्यक्रम आयोजित किए गए। पीले वस्त्र धारण कर मां सरस्वती का पूजन किया। देव भूमि बिहारी महासभा की ओर से कौलागढ़ कैनाल रोड पर पांच फुट की मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित की गई और पूजन हुआ।

महिलाओं की टोली ने दिनभर भजन-कीर्तन किए। शनिवार को विधि-विधान से देवी की प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा। इस मौके पर प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्य कांत धस्माना, जीतेंद्र कुमार, हीरा कुमार, वीरेंद्र, घनश्याम वर्मा आदि ने पूजन किया। संस्कार परिवार सेवा समिति की ओर से माता वैष्णों देवी गुफा मंदिर में सरस्वती पूजन किया गया।

इस मौके पर आचार्य बिपिन जोशी ने कहा कि वसंत पंचमी के दिन एक गरीब बच्चे को शिक्षित करने का संकल्प लेना चाहिए। इस दौरान गरीब बच्चों को पाठ्य सामग्री वितरित की गई। पटेलनगर स्थित श्री श्याम सुंदर मंदिर में सभी देवी-देवताओं को पीले वस्त्र धारण कराए गए।

भजन गायक तजेंद्र हरजाई, गोविंद मोहन आदि ने ‘तुम्हारी याद आती है बताओ क्या करें मोहन’ आदि भजन गाए। कार्यक्रम में अवतार मुनियाल, भूपेंद्र चड्डा, ओम प्रकाश सूरी, जोगिंदर सिंह, यशपाल मग्गो आदि उपस्थित थे। वसंत पंचमी के मौके पर नुपूर डांस एकेडमी की ओर से बसंतोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर मां सरस्वती की अर्चना में खूबसूरत नृत्य प्रस्तुत किए गए।
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हर्षोल्लास से ऋतुराज वसंत की अगवानी

वसंत पंचमी का पर्व नगर में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। विभिन्न स्थानों पर मां सरस्वती के पूजन के साथ अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन हुआ। देर शाम तक युवा पतंगबाजी का लुत्फ उठाते देखे गए। वसंत पंचमी के दिन विभिन्न चौराहों पर होली का ध्वजारोहण भी किया गया।

शुक्रवार को नगर और ग्रामीण क्षेत्र डोईवाला में वसंतोत्सव पर्व हर्षोल्लास और पारंपरिक ढंग से मनाया गया। लोगों ने शुक्रवार को पीले वस्त्रों का धारण कर मां सरस्वती का विधिवत पूजन किया। ऋषिकेश रोड स्थित हरज्ञान चंद सरस्वती शिशु मंदिर डोईवाला में वसंतोत्सव पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

स्कूली बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियों से लोगों को मन मोह लिया। मुख्य अतिथि ऋषिकेश विधायक प्रेमचंद अग्रवाल, कार्यक्रम अध्यक्ष अश्विनी कुमार कंचन, प्रधानाचार्य तरुणकांत त्यागी आदि मौजूद रहे। वसंत पंचमी पर नगर में पतंगबाजी की धूम रही।

सुबह से ही लोग पतंगों की दुकानों पर खरीदारी के लिए पहुंचने लगे थे। प्रेमनगर बाजार के दुकानदार अनूप कुमार वर्मा ने बताया कि वसंत पंचमी पर पतंगबाजी का प्रदर्शन होता आया है। पर्व पर लोगों ने जमकर पतंगों की खरीदारी की। शाम तक लोगों ने पतंगबाजी के मुकाबलों का लुत्फ उठाया। दूसरी ओर वसंत पंचमी पर्व पर नगर के चौराहों पर होली के आगमन का ध्वज स्थापित किया गया। युवाओं ने पीला ध्वज चौराहों पर स्थापित किया।

सरसों संरक्षण दिवस के रूप में मनाई वसंत पंचमी
जैव-विविधता एवं संरक्षण फार्म नवधान्य में किसानों ने वसंत पंचमी को सरसों संरक्षण दिवस के रूप में मनाया। सरस्वती वंदना के बाद किसानों ने सरसों के बीजों से परंपरागत विधि से तेल निकाला। वहीं, जैव यांत्रिक विधि से बने सरसों के बीच से होने वाले नुकसान की जानकारी दी।

रामगढ़ में वसंत पंचमी पर आयोजित कार्यक्रम में नवधान्य के कार्यकारी निदेशक डा. विनोद कुमार भट्ट ने कहा भारत त्योहार और उत्सवों का देश है। वसंत ऋतु का स्वागत उत्सव के रूप में मनाए जाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है।
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